श्री रामचन्द्र मिशन आश्रम का स्वर्ण जयंती समारोह ‘बसंत उत्सव 2026’ से गूंजेगी आध्यात्मिक चेतना 12 फरवरी से 2 मार्च तक पांच चरणों में होगा आयोजन
शाहजहांपुर: शाहजहांपुर (Shahjahanpur) की धरती केवल ऐतिहासिक और अमर शहीदों की स्मृतियों की ही वाहक नहीं रही है, बल्कि यह आध्यात्मिक चेतना की भी एक उज्ज्वल प्रयोगशाला रही है। यह हम सब के लिए गौरव की बात है कि वर्ष 1945 में इसी पुण्यभूमि पर महात्मा रामचन्द्र जी महाराज (Mahatma Ramchandra Ji Maharaj) ने श्री रामचन्द्र मिशन की स्थापना की थी। यह स्थापना मात्र एक संस्था का जन्म नहीं था बल्कि मानव हृदय को आत्मबोध की ओर ले जाने वाला एक आध्यात्मिक आंदोलन था जिसने निरंतर विस्तार पाया और आज विश्व के 164 देशों में श्री रामचन्द्र मिशन के केंद्र हैं।
वर्ष 1976 में शाहजहांपुर में महात्मा रामचन्द्र जी महाराज (बाबूजी) ने अपने गुरु फतेहगढ़ के महात्मा रामचन्द्र जी महाराज (लालाजी) की स्मृति में मिशन के प्रथम आश्रम की स्थापना की थी। यह आश्रम साधकों के लिए साधना, सेवा, समर्पण और आध्यात्मिक चेतना के विकास का स्थायी केंद्र बना। यह आश्रम केवल ईंट-पत्थरों की संरचना नहीं, बल्कि अनगिनत आत्माओं के अंतर्मन को शांति, प्रेम और सौहार्द से आलोकित करने वाला आध्यात्मिक तीर्थ बन गया।
अब यह आश्रम अपनी स्वर्ण जयंती की देहरी पर खड़ा है-पचास वर्षों की साधना, सेवा और संकल्प की गौरवशाली कथा को समेटे हुए इस ऐतिहासिक अवसर पर आश्रम का वृहद स्तर पर जीर्णोद्धार किया गया है। आश्रम की पचास वर्षों की स्वर्णिम यात्रा के पूर्ण होने पर श्री रामचन्द्र मिशन के अध्यक्ष और पूज्य गुरुदेव कमलेश डी पटेल (दाजी) के सानिध्य और मार्गदर्शन में स्वर्ण जयंती समारोह ‘बसंत उत्सव 2026’ का आयोजन किया जा रहा है।
12 फरवरी से उत्सव का शुभारंभ
श्री रामचन्द्र मिशन आश्रम में 12 फरवरी से 2 मार्च तक पांच चरणों में ‘बसंत उत्सव 2026’ का आयोजन किया जा रहा है।
पांच चरणों में होगा उत्सव
बसंत उत्सव पांच चरणों आयोजित किया जा रहा है प्रत्येक चरण में देश विदेश से करीब पांच हजार लोग सहभागिता कर आध्यात्मिक विकास के वाहक बनेंगे।
पहला चरण 12 फरवरी से 14 फरवरी, दूसरा चरण 16 फरवरी से 18 फरवरी, तीसरा चरण 20 फरवरी से 22 फरवरी, चौथा चरण 24 फरवरी से 26 फरवरी तथा पांचवा चरण 28 फरवरी से 2 मार्च तक चलेगा। इस तरह 20 दिनों तक चलने वाले इस आध्यात्मिक महाकुंभ में लगभग 25 से 30 हजार लोगों के यहां पहुंचने की संभावना है।
अभ्यासियों के ठहरने और अन्य व्यवस्थाएं
बाहर से आने वाले अभ्यासियों के ठहरने की व्यवस्था आश्रम परिसर और विभिन्न होटलों और गेस्ट हाउस में की गई है। सभी अभ्यासियों के भोजन की व्यवस्था आश्रम परिसर में रहेगी।
आवागमन की व्यवस्था
बाहर से आने वाले अभ्यासियों के लिए रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन से आश्रम लाने और वापस पहुंचाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई है। 24 घंटे मिशन के स्वंय सेवक रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन पर मौजूद रहेंगे। साथ ही लखनऊ हवाई अड्डा, दिल्ली हवाई अड्डा, लखनऊ रेलवे स्टेशन पर भी किसी अभ्यासी को असुविधा न हो इसके लिए मिशन के स्वंय सेवक मौजूद रहेंगे।
यह आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मिक मिलन का महाकुंभ होगा। विविध आध्यात्मिक सत्र, ध्यान शिविर और सत्संग कार्यक्रमों के माध्यम से यह समारोह मानव जीवन को अंतर्मुखी बनाने की प्रेरणा देगा। यह स्वर्ण जयंती समारोह अतीत की उपलब्धियों का स्मरण और भविष्य के संकल्पों का उद्घोष है। शाहजहांपुर की इस पुण्य धरा से उठने वाली साधना की यह ध्वनि आज विश्व के कोने-कोने तक पहुँच चुकी है। श्री रामचन्द्र मिशन का यह आश्रम आज भी मानव को मानवता से जोड़ना के मूल उद्देश्य को लेकर अग्रसर है। स्वर्ण जयंती का यह महापर्व केवल एक संस्था का उत्सव नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना के उत्थान का सामूहिक संकल्प है, जहाँ श्रद्धा, साधना और सेवा एक साथ प्रवाहित होगें।


