बजट सत्र में सत्ता-विपक्ष आमने-सामने, राहुल गांधी का मुद्दा बना टकराव की धुरी, लोकसभा-राज्यसभा में हंगामे से ठप रही कार्यवाही
नई दिल्ली
संसद के बजट सत्र के सातवें दिन भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के बीच लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में हंगामे के कारण कार्यवाही बार-बार बाधित रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राज्यसभा में शाम पांच बजे जवाब देने की संभावना के बीच लोकसभा में गतिरोध इतना गहरा गया कि चर्चा पूरी तरह से आगे नहीं बढ़ सकी। आठ सांसदों के निलंबन और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को कथित तौर पर बोलने से रोके जाने के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार पर लोकतांत्रिक मर्यादाओं को कुचलने का आरोप लगाया, जबकि सत्तापक्ष ने विपक्ष के रवैये को गैर-जिम्मेदार बताया।
लोकसभा में हंगामे पर नाराजगी जताते हुए स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही शुरू होते ही स्थगित कर दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सदन में मर्यादा बनाए रखना सभी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है और मौजूदा हालात में कार्यवाही चलाना संभव नहीं है। इसके बावजूद हंगामा थमता न देख लोकसभा की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित करनी पड़ी। इसी बीच स्पीकर ने धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित होने की घोषणा कर दी, जिससे विपक्ष और अधिक आक्रोशित नजर आया।
राजनीतिक बयानबाजी भी पूरे दिन तेज रही। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस अब एक परिवार और गांधी तक सिमट कर रह गई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर कांग्रेस वास्तव में लोकतांत्रिक होती तो सबसे पहले राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को निलंबित किया जाता। बिट्टू ने कांग्रेस नेतृत्व पर अपने सांसदों को ‘बंधुआ मजदूर’ की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया, जिससे राजनीतिक तापमान और बढ़ गया।
राहुल गांधी को ‘अबोध’ कहे जाने पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भड़क उठीं। उन्होंने इस भाषा को असंसदीय बताते हुए सवाल किया कि आखिर सत्तापक्ष किस बात से डर रहा है। प्रियंका ने कहा कि क्या सरकार सवालों से डर रही है—चाहे वह किताबों के उद्धरण हों, अंतरराष्ट्रीय फाइलें हों या फिर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर जवाबदेही का मुद्दा।
कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने इसे संसदीय लोकतंत्र पर सीधा हमला करार देते हुए कहा कि विपक्ष के नेता को बोलने का अधिकार नकारा जा रहा है। उन्होंने दो टूक कहा कि विपक्ष का एकमात्र एजेंडा यही है कि नेता प्रतिपक्ष को सदन में अपनी बात रखने दी जाए। उधर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘लिंचिंग’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताई और सभापति से ऐसे शब्दों को कार्यवाही से हटाने की मांग की।
लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी माहौल गर्म रहा। नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लोकसभा में राहुल गांधी को न बोलने दिए जाने का मुद्दा उठाया और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अहम विषयों पर चर्चा की मांग की। हालांकि सभापति और सदन के नेता ने साफ किया कि लोकसभा की कार्यवाही का मुद्दा राज्यसभा में नहीं उठाया जा सकता। इसके बावजूद विपक्ष ने इस मसले को लेकर रणनीति तेज कर दी है और राज्यसभा में भी सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है।
कुल मिलाकर बजट सत्र का यह दिन सत्ता और विपक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव का गवाह बना, जहां संवाद की जगह आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे ने ले ली। लोकतंत्र के मंदिर में ठहरी कार्यवाही ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अहम नीतिगत बहसें राजनीतिक शोर में दबती चली जाएंगी।






