“आय दोगुनी” के दावों के बीच किसान बेहाल
फर्रुखाबाद। जनपद समेत पूरे आलू उत्पादक क्षेत्र में इन दिनों आलू किसानों में भारी हाहाकार मचा हुआ है। खेतों में लहलहाती फसल किसान की मेहनत का सबूत तो है, लेकिन मंडियों में औने-पौने दामों ने अन्नदाता की कमर तोड़ दी है। हालात यह हैं कि किसान को आलू की लागत तक नहीं मिल पा रही, जबकि जिम्मेदार तंत्र लगातार किसान की आय दोगुनी होने के दावे करता नहीं थक रहा।
बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, डीज़ल, मजदूरी और भंडारण पर बढ़ती लागत के बीच आलू किसान पूरी तरह पिस चुका है। मंडियों में आलू के भाव इतने गिर चुके हैं कि किसान को फसल बेचकर भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कोल्ड स्टोरेज का किराया अलग से किसान की जेब पर बोझ बन रहा है।
किसानों का कहना है कि आय दोगुनी करने के बड़े-बड़े नारों से पेट नहीं भरता।“दोगुनी आय छोड़िए, पहले आलू किसानों को उनकी लागत का ही सही मूल्य दिलाया जाए।
किसानों और किसान संगठनों की प्रमुख मांग है कि आलू का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित किया जाए
सरकारी स्तर पर आलू की खरीद की जाए
खरीदे गए आलू को राशन दुकानों के माध्यम से आम जनता में वितरित किया जाए, ताकि किसान को भी राहत मिले और गरीब को सस्ता भोजन भी
नीति और नीयत दोनों पर सवाल
किसानों का आरोप है कि सरकार अनाज की खरीद तो करती है, लेकिन आलू जैसे नकदी फसल उत्पादकों को पूरी तरह बाजार के भरोसे छोड़ दिया गया है। इससे बिचौलियों को फायदा और किसान को नुकसान हो रहा है।
बीजेपी नेता अशोक कटियार नें किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही आलू किसानों के हित में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में आंदोलन की राह भी अपनाई जा सकती है।






