फर्रुखाबाद: जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय (District School Inspector Office) में तैनात शातिर लिपिकों के कारनामों ने पूरे जिले के प्रशासनिक गलियारों में सनसनी फैला दी है। चौंकाने वाला खुलासा यह है कि वर्ष 2013 में नवाबगंज क्षेत्र के चांदपुर स्थित कृष्णा पब्लिक स्कूल की मान्यता फर्जी (fake recognition) तरीके से कराई गई थी — और उस वक्त मान्यता पटल प्रभारी के रूप में तैनात रहा लिपिक राजीव यादव इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, उस समय राजीव लिपिक जिला बेसिक शिक्षा कार्यालय में पदस्थ था और वहीं से उसने कृष्णा पब्लिक स्कूल की फर्जी मान्यता का पूरा ताना-बाना बुना। इसी दौरान उसकी नजदीकियां कुख्यात वकील और पुलिस के दलाल के रूप में चर्चित अवधेश मिश्रा से बढ़ीं, जिसके बाद वह उसका “दाहिना हाथ” बन गया।
बाद में जब इस लिपिक को बीएसए कार्यालय से हटाकर जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में भेजा गया, तो यहां अवधेश नें लिपिक राजेश अग्निहोत्री के साथ मिलकर खेल शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि दोनों ने मिलकर अवधेश मिश्रा की “काला धन” की कड़ियों को छिपाने में अहम भूमिका निभाई और उसके कई शिक्षण संस्थानों में अपनी अपनी रकम निवेश कराई।
दो जिलाधिकारियों के आदेशों पर फाइल गायब!
मामले की गंभीरता तब बढ़ गई जब तत्कालीन जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह और उनके बाद जिले पर तैनात हुए डीएम संजय कुमार सिंह दोनों ने कृष्णा पब्लिक स्कूल और एस.के.एम. इंटर कॉलेज चांदपुर नवाबगंज से जुड़े फर्जी मान्यता प्रकरण में एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए।
लेकिन जैसे ही आदेश जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पहुंचे — वहां तैनात दोनों शातिर बाबुओं ने पूरी फाइल ही गायब कर दी।
यह मामला अब इतना संगीन हो गया है कि पुलिस क्षेत्राधिकारी नगर ने संबंधित फाइल जिला विद्यालय निरीक्षक से तलब की है। फाइल तलब होने की सूचना से पूरे शिक्षा महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। मामले की रिपोर्ट अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय के संज्ञान में है, जबकि पीड़ित पक्ष इस पूरे फर्जीवाड़े को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करने की तीसरी बार तैयारी कर रहा है।
यह पहली बार नहीं है जब इन बाबुओं की भूमिका संदिग्ध बताई गई हो — प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जिले में हर बड़े शैक्षणिक भ्रष्टाचार के पीछे इन दोनों लिपिकों का नाम किसी न किसी रूप में जुड़ा पाया गया है।जिले के शिक्षा और प्रशासनिक दफ्तरों में इस समय “शातिर बाबू के खेल” की चर्चा जोरों पर है। दो-दो जिलाधिकारियों के आदेशों पर भारी पड़े इन लिपिकों की कार्यशैली पर अब कई सवाल उठ रहे हैं। जनता यह पूछ रही है कि जब फर्जी मान्यता और भ्रष्टाचार के इतने ठोस सबूत जिलाधिकारी तक के स्तर पर साबित हो चुके हैं, तो आखिर अब तक कार्रवाई में देरी क्यों?
फाइल की बरामदगी और जांच रिपोर्ट के बाद इस मामले में कई बड़े नामों के उजागर होने की संभावना है। यदि यह साबित हो गया कि बाबुओं ने फर्जी मान्यता और काले धन को छिपाने में जानबूझकर भूमिका निभाई, तो उनके खिलाफ निलंबन के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई तय मानी जा रही है। करवाही की तैयारी देख जीआईसी फर्रुखाबाद में तैनात बाबू राजेश अग्निहोत्री को तो जिला विद्यालय निरीक्षक ने आनन -फानन में बीते दिनों अपने कार्यालय से कार्य मुक्त कर दिया लेकिन अभी राजीव यादव तैनात है। फिलहाल, जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से लेकर अवधेश मिश्रा के करीबी दायरे तक सन्नाटा और घबराहट का माहौल है।


