लखनऊ| राजधानी में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की टीम ने 17.51 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले का पर्दाफाश करते हुए एक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। इस गिरफ्तारी से न केवल सरकारी तंत्र में हड़कंप मचा है, बल्कि अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की सुगबुगाहट शुरू हो गई है।
EOW अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्ति का नाम अमित शुक्ला है, जो एक निजी वित्तीय कंपनी में वरिष्ठ पद पर कार्यरत था। आरोपी पर आरोप है कि उसने फर्जी खातों के जरिये सरकारी योजनाओं और निजी निवेशकों के धन को ठिकाने लगाया। इस रकम को अलग-अलग कंपनियों में घुमाकर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह पूरा मामला वर्ष 2022 से 2024 के बीच का है, जब आरोपी ने फर्जी दस्तावेज़ों के सहारे सरकारी परियोजनाओं के लिए आए धन को अपने निजी खातों में ट्रांसफर कराया। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि आरोपी ने अपने नाम से और परिवार के नाम पर करीब दर्जनभर फर्जी कंपनियां खोलीं, जिनके माध्यम से करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई।
EOW के अफसरों ने बताया कि आरोपी को शुक्रवार देर रात गोमतीनगर विस्तार इलाके से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान उसने कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी हैं। अधिकारियों का दावा है कि उसके इशारों पर एक पूरा नेटवर्क काम करता था, जिसमें कुछ बैंक अधिकारियों और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है।
EOW के डीआईजी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 और 120B के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। साथ ही, मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) से भी समन्वय किया जा रहा है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी ने अब तक जो खुलासे किए हैं, उससे इस घोटाले के कई और पहलू सामने आ सकते हैं। जांच एजेंसियों ने उसके बैंक खातों और संपत्तियों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक अनुमान है कि आरोपी ने लखनऊ, नोएडा, और जयपुर में कई अचल संपत्तियाँ खरीदी हैं, जिनकी कुल कीमत 20 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
EOW के अधिकारियों ने बताया कि यह गिरफ्तारी इस केस की बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि पिछले एक साल से आरोपी फरार चल रहा था और अपनी लोकेशन बार-बार बदल रहा था। उसे पकड़ने के लिए टीम ने तकनीकी सर्विलांस और बैंक लेनदेन की गहराई से पड़ताल की।
घोटाले की सूचना सामने आने के बाद निवेशकों में भी आक्रोश है। कई लोगों ने EOW कार्यालय पहुंचकर अपनी शिकायतें दर्ज कराईं हैं। विभाग ने सभी पीड़ितों से दस्तावेज और भुगतान की रसीदें मांगी हैं, ताकि रकम की वास्तविकता का पता लगाया जा सके।
डीआईजी EOW ने बताया कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। फिलहाल आरोपी को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है ताकि धन के वास्तविक प्रवाह और अन्य साझेदारों की भूमिका स्पष्ट हो सके।
राजधानी में इस गिरफ्तारी को आर्थिक अपराधों के खिलाफ बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री स्तर पर भी इस प्रकरण की रिपोर्ट मांगी गई है।






