नई दिल्ली। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने मध्य प्रदेश के आर्मी वॉर कॉलेज, महो में आयोजित प्रथम त्रि-सेवा संगोष्ठी ‘रण संवाद’ को संबोधित करते हुए कहा कि भारत एक शांतिप्रिय राष्ट्र है, लेकिन शांतिवादी नहीं हो सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि शक्ति के बिना शांति केवल एक कल्पना है और यदि शांति चाहिए तो युद्ध के लिए हमेशा तैयार रहना होगा।अपने संबोधन में जनरल चौहान ने युद्ध की तकनीकों और रणनीतियों के अकादमिक विश्लेषण पर जोर देते हुए कहा कि हमें न केवल तकनीक में बल्कि विचारों और व्यवहार में भी आत्मनिर्भर होना होगा। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से युद्ध संबंधी सैद्धांतिक और व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी बढ़ाने का आह्वान किया।सीडीएस ने कहा, भारत हमेशा शांति का पक्षधर रहा है। हम एक शांतिप्रिय राष्ट्र हैं, लेकिन हम शांतिवादी नहीं हो सकते। शक्ति के बिना शांति संभव नहीं। यदि आप शांति चाहते हैं तो युद्ध के लिए तैयार रहना जरूरी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि महाभारत में अर्जुन महान योद्धा थे, लेकिन विजय की ओर ले जाने के लिए उन्हें श्रीकृष्ण की आवश्यकता थी। उसी तरह चंद्रगुप्त मौर्य को सफलता दिलाने में चाणक्य के ज्ञान का योगदान रहा।
जनरल चौहान ने शस्त्र और शास्त्र दोनों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ये एक ही तलवार के दो सिरे हैं। उन्होंने कहा कि भारत गौतम बुद्ध, महावीर जैन और महात्मा गांधी की भूमि है, जहां अहिंसा का संदेश दिया गया, लेकिन इसके साथ ही देश की सुरक्षा और रणनीतिक मजबूती भी उतनी ही आवश्यक है।सीडीएस ने इस मौके पर पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष रूप से संदेश देते हुए कहा कि भारत शांति का पक्षधर है, लेकिन यदि चुनौती दी गई तो जवाब देने में सक्षम है। उन्होंने सभी क्षेत्रों में आत्मनिर्भर भारत की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि एक विकसित राष्ट्र बनने के लिए हमें सशस्त्र, सुरक्षित और आत्मनिर्भर होना होगा।






