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Thursday, October 15, 2026

राष्ट्रपति भवन पर 5 बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला, 4 लोगों की मौत; प्रधानमंत्री और कई मंत्री सुरक्षित

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अदन। यमन के अदन शहर में हूती विद्रोहियों ने राष्ट्रपति भवन परिसर पर पांच बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का दावा किया है। हमले के समय प्रधानमंत्री शाया मोहसेन अल-जिंदानी और सरकार के कई मंत्री परिसर में मौजूद थे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सभी सुरक्षित हैं। यमन के सूचना मंत्रालय के अनुसार, इस हमले में चार लोगों की मौत हुई है, जिनमें दो सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उनका निशाना अदन में सऊदी अरब के सैन्य अभियान से जुड़ा मुख्यालय था। हूती मीडिया ने हथियारों के भंडार को निशाना बनाने की बात भी कही है, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

सऊदी अरब के समर्थन से लड़ रही यमन की सरकार: अदन यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार की अंतरिम राजधानी है। देश में सरकार और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच लंबे समय से संघर्ष जारी है। सऊदी अरब यमन की मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है और हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ रही सरकारी सेनाओं को सैन्य सहायता देता रहा है। वहीं, ईरान पर हूतियों को समर्थन देने के आरोप लगते रहे हैं। राष्ट्रपति भवन परिसर पर मिसाइल हमले की घटना ऐसे समय हुई है, जब यमन में राजनीतिक और सैन्य तनाव पहले से बना हुआ है। इस हमले से क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ सकती हैं। हालांकि, इसके बाद संघर्ष की स्थिति किस दिशा में जाएगी, यह आने वाले घटनाक्रम पर निर्भर करेगा।

चीन से मिले पुर्जों की मदद से मिसाइल बनाने की कोशिश का दावा: ब्रिटेन की संस्था कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च (CAR) की बुधवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, हूती विद्रोही चीन से मंगाए गए पुर्जों की मदद से नई बैलिस्टिक मिसाइल विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वे ईरान में डिजाइन की गई खैबर शिकन मिसाइल जैसी मिसाइल तैयार करना चाहते हैं। इस मिसाइल की बताई गई मारक क्षमता लगभग 1,500 किलोमीटर है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि हूती इस तरह का हथियार विकसित करने में सफल होते हैं, तो उनकी लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता बढ़ सकती है। हालांकि, मिसाइल निर्माण से जुड़े इन दावों को रिपोर्ट में उपलब्ध साक्ष्यों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।

मिसाइल क्षमता बढ़ने से क्षेत्रीय सुरक्षा पर चिंता: यमन में जारी संघर्ष का असर केवल देश तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसका संबंध व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा से भी है। सऊदी अरब लंबे समय से यमन की सरकार का समर्थन करता आया है, जबकि हूती विद्रोहियों की सैन्य गतिविधियों को लेकर कई देशों ने चिंता जताई है। नई मिसाइल विकसित करने की कोशिशों से जुड़े दावे सही साबित होते हैं, तो इससे क्षेत्र में लंबी दूरी के हमलों की क्षमता को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं। फिलहाल, अदन में राष्ट्रपति भवन परिसर पर हुए हमले में चार लोगों की मौत की सूचना है, जबकि प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों के सुरक्षित होने की बात कही गई है। हमले के लक्ष्य और हथियारों को हुए नुकसान से संबंधित हूतियों के दावों की पुष्टि होना अभी बाकी है।

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