प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कहा कि दुनिया भारत पर सस्ती दवाओं से लेकर प्रतिभा तक के लिए भरोसा करती है। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया को शून्य जैसी महत्वपूर्ण खोज दी, लेकिन कभी इसके बदले श्रेय या रॉयल्टी नहीं मांगी। भारत की ताकत दूसरों के लिए अवसर पैदा करने और देशों को जोड़ने में है। इस फोरम का आयोजन पहली बार भारत में किया जा रहा है।
मोदी ने अपने करीब 25 मिनट के संबोधन में कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत ने 100 से अधिक देशों तक वैक्सीन पहुंचाई और अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल मानवता के हित में किया। उन्होंने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऊर्जा, खनिज और सप्लाई चेन अब वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे समय में दुनिया को भरोसेमंद साझेदारों की जरूरत है।
प्रधानमंत्री ने आर्थिक विकास का जिक्र करते हुए दावा किया कि पिछले एक दशक में भारत में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। उन्होंने भारत की GDP ग्रोथ 7.8% और विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से अधिक होने की बात कही। उनके मुताबिक, 2014 के बाद मोबाइल डेटा सस्ता होने से छोटे शहरों और कस्बों के छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई, जानकारी और रोजगार के नए अवसर मिले हैं। उन्होंने कारोबार को आसान बनाने, आर्थिक सुधारों और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने पर भी जोर दिया।
मोदी ने कहा कि भारत का उद्देश्य केवल अपनी ताकत बढ़ाना नहीं, बल्कि लोगों को सशक्त बनाना और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देना है। उन्होंने भारत को लोकतंत्र की जननी बताते हुए कहा कि ज्ञान, धन और शक्ति का म


