भारतीय रिजर्व बैंक का बड़ा फैसला, रेपो दर बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत
– 25 आधार अंक की बढ़ोतरी से कर्ज महंगा होने की आशंका
– महंगाई पर नियंत्रण के लिए सख्त रुख
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने बुधवार को नीतिगत ब्याज दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी का फैसला किया है। इसके बाद रेपो दर 5.25 प्रतिशत से बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो गई है। केंद्रीय बैंक का यह फैसला महंगाई के दबाव को नियंत्रित करने और अर्थव्यवस्था में मूल्य स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रेपो दर वह ब्याज दर है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को अल्पावधि के लिए धन उपलब्ध कराता है। जब इसमें बढ़ोतरी होती है तो बैंकों के लिए धन जुटाना महंगा हो सकता है और इसका असर आगे चलकर कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ सकता है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने करीब चार वर्ष के अंतराल के बाद रेपो दर में बढ़ोतरी की है। मौद्रिक नीति समिति के छह सदस्यों ने दर बढ़ाने के फैसले का समर्थन किया। केंद्रीय बैंक ने अपने नीतिगत रुख में भी बदलाव किया है, जिससे संकेत मिलता है कि महंगाई को लेकर उसकी चिंता बढ़ी है।
महंगाई दर में बढ़ोतरी भी रिजर्व बैंक के फैसले का महत्वपूर्ण आधार मानी जा रही है। अगस्त में खुदरा महंगाई 4.82 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि रिजर्व बैंक का मध्यम अवधि का लक्ष्य 4 प्रतिशत है। महंगाई के लक्ष्य से ऊपर बने रहने के कारण केंद्रीय बैंक ने ब्याज दर बढ़ाकर अर्थव्यवस्था में कीमतों के दबाव को नियंत्रित करने का प्रयास किया है।
दूसरी ओर भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर मजबूत बनी हुई है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि का अनुमान 7.1 प्रतिशत किया गया है। अप्रैल से जून तिमाही में अर्थव्यवस्था की वास्तविक वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही।
रेपो दर बढ़ने का सीधा असर बैंक से लिए जाने वाले घर, वाहन और अन्य परिवर्तनीय ब्याज दर वाले कर्ज पर पड़ सकता है। यदि बैंक अपनी ब्याज दरें बढ़ाते हैं तो आने वाले समय में कर्ज की मासिक किस्त बढ़ सकती है।
दूसरी ओर, बैंकों की जमा योजनाओं और सावधि जमा पर ब्याज दर बढ़ने की संभावना भी रहती है। इससे बचत करने वालों को कुछ राहत मिल सकती है।


