नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री बीएल वर्मा को भाजपा की ओर से राज्यसभा का टिकट नहीं दिए जाने के बाद बदलाव की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। दोनों का राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है।
हरदीप पुरी और बीएल वर्मा को मिलाकर पिछले चार महीनों में केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल से पांच मंत्री कम होने की स्थिति बन रही है। इससे पहले रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें मंत्रिमंडल छोड़ना पड़ा था। वहीं धर्मेंद्र प्रधान भी मंत्रिमंडल से बाहर हो चुके हैं।
मंत्रिमंडल फेरबदल में भाजपा संगठन से जुड़े जमीनी और युवा नेताओं को प्राथमिकता मिलने के संकेत हैं। केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद से ही मंत्रिमंडल में बदलाव की चर्चा चल रही थी। हालांकि अकाली दल के साथ संभावित गठबंधन के कारण इसे टाल दिया गया था। गठबंधन की घोषणा के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना जताई जा रही है।
मोदी सरकार के इस कार्यकाल में प्रस्तावित फेरबदल को अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि 2029 के लोकसभा चुनाव तक सरकार इसी टीम के साथ आगे बढ़ सकती है। ऐसे में क्षेत्रीय और राजनीतिक समीकरणों के साथ संगठन में सक्रिय नेताओं को सरकार में जगह देने पर मंथन चल रहा है।
महिला और युवा चेहरों को भी मंत्रिमंडल में अधिक प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है। 2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण अहम मुद्दा बन सकता है। इसके मद्देनजर सरकार में महिलाओं की संख्या बढ़ाने के साथ युवाओं के बीच पकड़ मजबूत करने के लिए नए चेहरों को आगे लाने की रणनीति पर भी विचार किया जा रहा है।


