शमशाबाद, फर्रुखाबाद। बीते दिनों तेज हवाओं के साथ हुई मूसलाधार बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार बारिश के कारण खेतों में जलभराव होने से धान सहित कई फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। वहीं बारिश के चलते कई गरीब परिवारों के कच्चे मकान भी धराशायी हो गए, जिससे उनकी गृहस्थी भी बर्बाद हो गई। प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसान अब प्रशासन से फसलों का सर्वे कराकर आर्थिक सहायता दिलाए जाने की मांग कर रहे हैं।
इसी क्रम में शमशाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम रजलामई निवासी किसान आशीष कुमार गंगवार पुत्र अजयवीर गंगवार ने शनिवार को उपजिलाधिकारी कायमगंज को शिकायती पत्र देकर अपनी बर्बाद हुई धान की फसल का मुआवजा दिलाने की मांग की है। किसान ने बताया कि उसकी करीब 22 बीघा धान की फसल भारी बारिश के कारण जलमग्न हो गई, जिससे फसल के नष्ट होने की स्थिति बन गई है।
किसान के मुताबिक गांव से कुछ दूरी पर स्थित खेत में उसने 22 बीघा भूमि पर धान की फसल तैयार की थी। फसल तैयार होने के समय हुई तेज बारिश से खेत में इतना अधिक पानी भर गया कि पूरी फसल जलमग्न हो गई। कई दिन बीत जाने के बाद भी खेत से पानी नहीं निकल सका है। लगातार जलभराव के कारण धान की फसल लगभग नष्ट हो चुकी है।
पीड़ित किसान ने बताया कि बारिश और जलभराव के कारण उसे करीब 50 हजार रुपये के नुकसान का अनुमान है। उसने उपजिलाधिकारी से संबंधित अधिकारियों को मौके पर भेजकर फसल का निरीक्षण और सर्वे कराने तथा नियमानुसार आर्थिक मुआवजा दिलाए जाने की मांग की है।
बताते चलें कि बीते दिनों क्षेत्र में करीब तीन दिनों तक तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया था। बारिश के कारण खेतों में पानी भर जाने से धान, गन्ना समेत अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा है। वहीं कई स्थानों पर कच्चे मकान गिरने की घटनाएं भी सामने आईं। मकान गिरने से कई परिवारों की गृहस्थी का सामान मलबे में दबकर खराब हो गया।
प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे किसानों और गरीब परिवारों का कहना है कि फसलों और मकानों को हुए नुकसान का प्रशासन द्वारा स्थलीय सर्वे कराया जाना चाहिए। किसानों ने मांग की है कि जिनकी फसलें बारिश और जलभराव के कारण नष्ट हुई हैं, उन्हें सरकारी नियमों के अनुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। वहीं जिन गरीब परिवारों के कच्चे मकान धराशायी हो गए हैं, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान उपलब्ध कराकर पुनर्वास की व्यवस्था की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि अतिवृष्टि से हुए नुकसान के बाद प्रभावित परिवारों को अब प्रशासन और सरकार की सहायता की आवश्यकता है, ताकि आपदा की मार से उबरकर किसान और गरीब परिवार दोबारा अपने जीवन को पटरी पर ला सकें।
अतिवृष्टि से 22 बीघा धान की फसल जलमग्न, किसान ने एसडीएम से मांगा मुआवजा


