– पैतृक जमीन से बेदखली का आरोप, अंतिम संस्कार के लिए खेत में जगह देने को लेकर परिवार और बाबा के बीच विवाद
लखनऊ। माल थाना क्षेत्र के आदमपुर गांव में पैतृक जमीन को लेकर चल रहे पारिवारिक विवाद के कारण एक युवक के शव का पांच दिनों तक अंतिम संस्कार नहीं हो सका। मृतक जयप्रकाश का शव पांच दिन तक घर के बरामदे में रखा रहा। परिवार का आरोप था कि उन्हें पैतृक जमीन से बेदखल कर दिया गया और अंतिम संस्कार के लिए भी खेत में जगह देने से इनकार कर दिया गया।
जानकारी के मुताबिक, जयप्रकाश की दिल्ली में मजदूरी के दौरान तबीयत बिगड़ गई थी। इलाज के दौरान 27 सितंबर को उसकी मौत हो गई। इसके बाद परिजन शव को पैतृक गांव आदमपुर लेकर पहुंचे। अंतिम संस्कार के लिए शव को खेत ले जाने पर जमीन को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
मृतक के छोटे भाई आशीष का आरोप है कि उनके बाबा शिवमंगल ने परिवार की जमीन का दान विलेख अपने अन्य पुत्रों के परिवार के नाम कर दिया था। उनका कहना है कि उनके पिता कृपाशंकर को जमीन में हिस्सा नहीं दिया गया। परिवार ने दान विलेख निरस्त कर जमीन में अपना हिस्सा देने की मांग की।
परिजनों का आरोप है कि जब वे जयप्रकाश का अंतिम संस्कार करने खेत पहुंचे तो बाबा और चाचा ने वहां अंतिम संस्कार करने से रोक दिया तथा अंतिम संस्कार के लिए रखी लकड़ियां भी हटा दी गईं। इसके बाद परिवार ने शव को घर के बरामदे में रख दिया और जमीन में हिस्सा मिलने तक अंतिम संस्कार नहीं करने की बात कही।
मामले की जानकारी मिलने पर तहसीलदार नितिन सिंह, लेखपाल और पुलिस टीम गांव पहुंची। प्रशासन की ओर से दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया गया। तहसीलदार ने अंतिम संस्कार के लिए पैतृक खेत में करीब 100 वर्ग फुट जमीन देने का प्रस्ताव रखा, लेकिन मृतक के परिजन जमीन के विवाद का समाधान और दान विलेख निरस्त करने की मांग पर अड़े रहे।
परिवार और प्रशासन के बीच सहमति नहीं बनने के बाद पुलिस ने हस्तक्षेप किया। गुरुवार शाम पुलिस की मौजूदगी में खेत में जयप्रकाश का अंतिम संस्कार कराया गया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर गांव में चर्चा बनी रही।
वहीं, मृतक के बाबा शिवमंगल ने परिवार के आरोपों से अलग पक्ष रखा। उनका कहना है कि उन्होंने पहले जयप्रकाश की मदद के लिए खेत के यूकेलिप्टस के पेड़ बेचकर करीब नौ लाख रुपये जुटाए थे और उससे कपड़े की दुकान तथा मेडिकल स्टोर खुलवाने में मदद की थी। बाबा का आरोप है कि जयप्रकाश ने रकम खर्च कर दी और परिवार को सहयोग नहीं किया। इसी वजह से उन्होंने जमीन अपने अन्य पुत्रों के परिवारों के नाम कर दी थी।
मामला अब पैतृक संपत्ति के अधिकार और दान विलेख से जुड़े विवाद के रूप में सामने आया है। अंतिम संस्कार तो करा दिया गया, लेकिन जमीन के अधिकार को लेकर परिवार का विवाद आगे कानूनी प्रक्रिया में जा सकता है।


