एमपी-एमएलए अदालत ने निचली अदालत की सजा निरस्त की, साक्ष्य पर्याप्त नहीं होने का दिया हवाला
लखनऊ। वर्ष 2016 में हुए धरना-प्रदर्शन और सड़क जाम के मामले में समाजवादी पार्टी के नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी और रामअचल राजभर को बड़ी कानूनी राहत मिली है। एमपी-एमएलए अदालत ने दोनों की अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई ढाई-ढाई हजार रुपये के जुर्माने की सजा को निरस्त कर दिया और दोनों को आरोपों से बरी कर दिया।
मामला वर्ष 2016 में हुए धरना-प्रदर्शन और सड़क जाम से जुड़ा है। इस प्रकरण में एमपी-एमएलए अदालत के विशेष अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 18 अक्टूबर 2022 को नसीमुद्दीन सिद्दीकी, रामअचल राजभर, मेवालाल, नौशाद अली और अतर सिंह राव को भारतीय दंड संहिता की धारा 143 और 141 के तहत दोषी ठहराया था। अदालत ने सभी पर 2,500-2,500 रुपये का जुर्माना लगाया था।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी और रामअचल राजभर ने इस फैसले को चुनौती देते हुए सत्र अदालत में अपील दाखिल की थी। इसी अपील पर सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश उमाकांत जिंदल ने दोनों को राहत दी।
एमपी-एमएलए अदालत ने दोनों की अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत के फैसले को निरस्त कर दिया। अदालत के अनुसार, विचारण अदालत ने मामले की पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों और तथ्यों पर पर्याप्त रूप से विचार किए बिना निष्कर्ष निकाला था। अपीलीय अदालत ने इसे न्यायोचित और विधि सम्मत नहीं माना।
अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष का कथानक संदेह से परे साबित नहीं हो सका और उपलब्ध साक्ष्य दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं थे। इसी आधार पर दोनों नेताओं को बरी किया गया।
मामला भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन प्रदेश उपाध्यक्ष दया शंकर सिंह के बयान के विरोध में हुए प्रदर्शन से जुड़ा था। अभियोजन के अनुसार, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, रामअचल राजभर और अन्य कार्यकर्ताओं ने लखनऊ के हजरतगंज चौराहे से विधानसभा की ओर प्रदर्शन किया था। इस दौरान मार्ग अवरुद्ध होने से यातायात प्रभावित होने का आरोप लगाया गया था।
वर्ष 2016 का यह विवाद उस समय प्रदेश की राजनीति में काफी चर्चा में रहा था। प्रदर्शन के दौरान हुए घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग मामले दर्ज हुए और बाद में कई आरोपियों के खिलाफ न्यायिक कार्यवाही चली। नसीमुद्दीन सिद्दीकी और रामअचल राजभर के खिलाफ सड़क जाम तथा धरना-प्रदर्शन से संबंधित मामले में निचली अदालत से मिली सजा के विरुद्ध दाखिल अपील पर अब फैसला आया है।
अदालत के ताजा आदेश के बाद नसीमुद्दीन सिद्दीकी और रामअचल राजभर पर इस मामले में निचली अदालत द्वारा लगाया गया 2,500 रुपये का जुर्माना प्रभावी नहीं रहेगा। दोनों को इस प्रकरण में बरी कर दिया गया है।


