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Friday, October 2, 2026

इंसानियत और प्रकृति के लिये विश्वास सबसे बड़ी जिम्मेदारी

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प्रो. एच. एन. शर्मा
मनुष्य के जीवन में बहुत सी चीजें महत्वपूर्ण होती हैं,धन, पद, प्रतिष्ठा, रिश्ते और सफलता। लेकिन इन सभी से ऊपर एक चीज होती है, विश्वास। विश्वास वह पूंजी है जिसे कमाया जाता है, खरीदा नहीं जा सकता। कोई व्यक्ति जब हम पर भरोसा करता है तो वह केवल अपने शब्द नहीं, बल्कि अपनी उम्मीद, भावनाएं और कई बार अपना भविष्य भी हमारे हाथों में सौंप देता है। इसलिए किसी के विश्वास के प्रति ईमानदार रहना केवल अच्छी आदत नहीं, बल्कि मनुष्य का नैतिक कर्तव्य है।
जिस व्यक्ति ने हम पर विश्वास किया है, उसके साथ परिस्थितियों के अनुसार व्यवहार बदलना उचित नहीं है। समय बदल सकता है, हालात बदल सकते हैं, लोगों की प्राथमिकताएं बदल सकती हैं, लेकिन सिद्धांत नहीं बदलने चाहिए। यदि किसी ने कठिन समय में हमारा साथ दिया है, हम पर भरोसा किया है या हमें कोई जिम्मेदारी सौंपी है, तो उस विश्वास का सम्मान करना हमारा दायित्व है।
धोखा किसी अनजान व्यक्ति से मिले तो उसका असर अलग होता है, लेकिन जब वही धोखा उस व्यक्ति से मिले जिस पर हमने विश्वास किया हो, तो चोट कहीं ज्यादा गहरी होती है। विश्वास टूटने के बाद केवल एक रिश्ता प्रभावित नहीं होता, बल्कि व्यक्ति के मन में भरोसे की भावना भी कमजोर हो जाती है।
इसीलिए हमें अपने व्यवहार और शब्दों दोनों के प्रति सजग रहना चाहिए। किसी से ऐसा वादा नहीं करना चाहिए जिसे हम निभा न सकें। किसी की उम्मीद जगाकर उसे बीच रास्ते में छोड़ देना भी विश्वास के साथ अन्याय है।
विश्वास के साथ सत्य का भी गहरा संबंध है। जिस रिश्ते की नींव सच पर होती है, वह कठिन परिस्थितियों में भी मजबूत रहता है। झूठ शायद कुछ समय के लिए समस्या को टाल दे, लेकिन वह समस्या को समाप्त नहीं करता।
कई बार सच बोलना कठिन होता है। सच बोलने से नुकसान हो सकता है, विरोध झेलना पड़ सकता है या कुछ लोग नाराज भी हो सकते हैं। फिर भी इंसान को परिस्थितियों के दबाव में अपने सिद्धांत नहीं छोड़ने चाहिए। क्योंकि व्यक्ति की असली परीक्षा आसान समय में नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में होती है।
जीवन में हर व्यक्ति को कोई न कोई जिम्मेदारी मिलती है। परिवार के प्रति जिम्मेदारी, समाज के प्रति जिम्मेदारी, कार्यस्थल की जिम्मेदारी और उन लोगों के प्रति जिम्मेदारी जिन्होंने हम पर भरोसा किया है।
कर्तव्य केवल वह काम नहीं जिसे मजबूरी में पूरा किया जाए। कर्तव्य वह जिम्मेदारी है जिसे हम अपनी अंतरात्मा की आवाज समझकर निभाते हैं। कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता; महत्वपूर्ण यह है कि उसे कितनी ईमानदारी और निष्ठा से किया गया।
यदि किसी व्यक्ति को कोई जिम्मेदारी सौंपी गई है तो उसे निजी स्वार्थ, दबाव या सुविधा के अनुसार छोड़ देना उचित नहीं है। जिम्मेदारी का सही अर्थ तभी है जब उसे कठिन परिस्थितियों में भी निभाया जाए।
इंसान की पहचान उसके पद या संपत्ति से नहीं होती। असली पहचान उसके व्यवहार, उसके शब्दों और उसके सिद्धांतों से होती है। लोग यह याद रखते हैं कि मुश्किल समय में कौन उनके साथ खड़ा रहा, किसने सच बोला और किसने मिले हुए विश्वास की रक्षा की।
इसलिए जीवन में तीन बातें हमेशा याद रखनी चाहिए,
जिसने विश्वास किया, उसके साथ ईमानदार रहिए।जो सच है, उसे सच कहने का साहस रखिए।
जो कर्तव्य मिला है, उसे पूरी निष्ठा से निभाइए।समय के साथ बहुत कुछ बदल जाता है, लेकिन अच्छे चरित्र की पहचान लंबे समय तक रहती है। किसी का विश्वास जीतना निश्चित रूप से बड़ी उपलब्धि है, लेकिन उससे भी बड़ी उपलब्धि उस विश्वास को वर्षों तक कायम रखना है।
विश्वास को टूटने मत दीजिए, सत्य को झुकने मत दीजिए और कर्तव्य से पीछे मत हटिए,यही एक मजबूत और सम्मानित व्यक्तित्व की पहचान है।
लेखक पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चंद्रशेखर के राजनैतिक सलाहकार रहे हैं।

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