– कथित वसूली, अभद्रता और विभागीय सामग्री के दुरुपयोग की शिकायत
– निदेशक से उच्चस्तरीय जांच की मांग
लखनऊ। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग में मुख्य सेविका नीतू सिंह को लेकर की गई शिकायत ने विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता हाजी गुलाम नबी ने निदेशक बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार को शिकायती पत्र भेजकर मुख्य सेविका पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से कथित अवैध वसूली, अभद्र व्यवहार और विभागीय सामग्री के कथित दुरुपयोग समेत कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नीतू सिंह के कार्यकाल के दौरान कुछ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से कथित तौर पर एक हजार रुपये तक की रकम लिए जाने का दबाव बनाया जाता था। शिकायतकर्ता का दावा है कि कथित वसूली का विरोध करने वाली कार्यकर्ताओं को नौकरी से हटाने की धमकी तक दी जाती थी।
मामले को और गंभीर बनाते हुए शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि मुख्य सेविका के खिलाफ इससे पहले भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और कर्मचारी संगठन की ओर से शिकायतें की जा चुकी हैं। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व में विभागीय स्तर पर जांच के बाद उनका स्थानांतरण किया गया था।
शिकायत में गरीब एवं जरूरतमंद महिलाओं और बच्चों के लिए विभाग की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली सामग्री के कथित दुरुपयोग का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराकर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि विभागीय सामग्री का वितरण निर्धारित नियमों के अनुसार हुआ या नहीं।
हाजी गुलाम नबी ने अपने शिकायती पत्र के साथ पूर्व में दिए गए शिकायत पत्रों और कर्मचारी संगठन की ओर से भेजे गए पत्रों को भी संलग्न किया है। इससे शिकायतकर्ता ने यह सवाल उठाया है कि यदि पहले भी शिकायतें सामने आई थीं तो उन पर क्या कार्रवाई हुई और वर्तमान स्थिति क्या है।
शिकायतकर्ता ने निदेशक से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने तथा आरोप सही पाए जाने पर मुख्य सेविका के खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में बर्खास्तगी की मांग भी की गई है।
अब सवाल यह है कि विभाग इन आरोपों पर क्या रुख अपनाता है? क्या पूर्व में मिली शिकायतों की जांच हुई थी, यदि हुई थी तो उसका निष्कर्ष क्या रहा और कथित वसूली तथा विभागीय सामग्री से जुड़े आरोपों की सच्चाई क्या है? इन सवालों का जवाब विभागीय जांच के बाद ही सामने आएगा।


