शरद कटियार
उत्तर प्रदेश की सियासत में जुबानी जंग कोई नई बात नहीं है। लेकिन जब रोजगार, नियुक्ति और सरकारी योजनाओं जैसे गंभीर मुद्दे राजनीतिक तंज का हिस्सा बन जाएं तो बहस का दायरा केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहता। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का समाजवादी पार्टी पर ताजा हमला इसी राजनीतिक माहौल की एक झलक है।
ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र बांटते हुए मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और बिना नाम लिए समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा। ‘टोटी चोरी’ के पुराने राजनीतिक विवाद को फिर सामने लाकर मुख्यमंत्री ने अपने विरोधियों पर व्यंग्य किया और साथ ही सरकार की नियुक्तियों को विकास तथा रोजगार की दिशा में उपलब्धि के तौर पर पेश किया।
यहां सवाल केवल टोटी का नहीं है। असली सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश का युवा नौकरी चाहता है, रोजगार चाहता है और ऐसी व्यवस्था चाहता है जिसमें उसकी योग्यता उसके भविष्य का आधार बने। राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप अपनी जगह हैं, लेकिन जनता के लिए परिणाम अधिक महत्वपूर्ण हैं।
मुख्यमंत्री ने अगले छह महीनों में एक लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र देने की बात कही है। यदि यह लक्ष्य निर्धारित समय में पूरा होता है तो इसका सीधा लाभ युवाओं और उनके परिवारों को मिलेगा। सरकार के लिए चुनौती भी यही है कि भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता, समयबद्धता और निष्पक्षता को लेकर जनता का भरोसा लगातार कायम रहे।
दूसरी ओर, विपक्ष की भूमिका केवल सरकार की आलोचना करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उसे यह भी बताना होगा कि रोजगार, भर्ती व्यवस्था और ग्रामीण विकास के मुद्दों पर उसका वैकल्पिक दृष्टिकोण क्या है। जनता अब केवल राजनीतिक कटाक्ष नहीं, बल्कि ठोस जवाब और ठोस परिणाम देखना चाहती है।
नियुक्ति पत्र पाने वाले युवाओं की खुशी इस पूरे प्रसंग का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है। किसी परिवार के लिए सरकारी नौकरी सिर्फ एक नियुक्ति नहीं होती, बल्कि आर्थिक स्थिरता, सामाजिक सम्मान और भविष्य की उम्मीद भी होती है। इसलिए रोजगार के सवाल को राजनीतिक बयानबाजी से ऊपर उठाकर देखा जाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘टोटी’ जैसे पुराने प्रतीकों की अपनी राजनीतिक स्मृति हो सकती है, लेकिन प्रदेश के युवाओं की नजर अब नौकरी की संख्या, भर्ती की पारदर्शिता और नियुक्ति की गति पर है। सरकार यदि अपने रोजगार संबंधी दावों को लगातार जमीन पर उतारती है तो वही उसका सबसे प्रभावी जवाब होगा।
सियासत में आरोप चलते रहेंगे, बयान आते-जाते रहेंगे। लेकिन अंततः जनता यह देखेगी कि उसके घर तक पानी पहुंचा या नहीं, युवा को रोजगार मिला या नहीं और सरकारी व्यवस्था में भरोसा कायम हुआ या नहीं। यही वह कसौटी है जिस पर सत्ता और विपक्ष,दोनों को जनता के सामने जवाब देना होगा।


