फरीदाबाद: हरियाणा के फरीदाबाद में बल्लभगढ़ (Ballabgarh) के गांव सीही में रविवार शाम पुराने बोरवेल में गिरी तीन साल की बच्ची नेहा की मौत हो गई। करीब 10 घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद सोमवार तड़के 3:55 बजे बच्ची को बोरवेल (borewell) से बाहर निकाला गया। इसके तुरंत बाद उसे सर्वोदय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जानकारी के अनुसार, रविवार शाम करीब 6 बजे नेहा पुराने बोरवेल में गिर गई थी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस-प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंचे और बच्ची को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान शुरू किया।
रेस्क्यू अभियान में NDRF और SDRF की टीमों को लगाया गया। बचाव कार्य को देखते हुए गाजियाबाद से सेना की एक टुकड़ी भी मौके पर पहुंची और अभियान में शामिल हुई। करीब दस घंटे की मशक्कत के बाद सोमवार सुबह 3:55 बजे बच्ची को बोरवेल से बाहर निकाला गया। इसके बाद उसे सर्वोदय अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
बच्ची तक पहुंचने के लिए रातभर खुदाई का काम चलता रहा। JCB समेत अन्य संसाधनों की मदद से बोरवेल के आसपास जमीन की खुदाई की गई। बचाव दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती जमीन के अंदर पानी आने की थी। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, करीब 120 फीट की गहराई के बाद पानी आने लगा था। इससे रेस्क्यू अभियान की रफ्तार प्रभावित हुई और टीमों को बेहद सावधानी के साथ खुदाई करनी पड़ी।
NDRF और SDRF के जवानों ने पानी के बीच भी बचाव अभियान जारी रखा। सेना की टीम ने भी अभियान में सहयोग किया। बच्ची तक पहुंचने के लिए बचाव दल लगातार खुदाई और अन्य तकनीकी प्रयास करते रहे। रातभर चले अभियान के दौरान पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे और रेस्क्यू कार्य की निगरानी करते रहे। करीब दस घंटे की मशक्कत के बाद सोमवार सुबह 3:55 बजे बच्ची को बोरवेल से बाहर निकाला गया।
बोरवेल से बाहर निकालने के तुरंत बाद नेहा को अस्पताल ले जाया गया। परिजनों और बचाव दल को उम्मीद थी कि बच्ची की जान बचाई जा सकेगी, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिवार में कोहराम मच गया। हादसे की खबर से गांव में भी शोक का माहौल है।
बताया गया है कि जिस जगह हादसा हुआ, वहां नगर निगम के पार्क की जमीन में पुराना बोरवेल बना हुआ था। हादसे के बाद पुराने और खुले बोरवेल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे पुराने और अनुपयोगी बोरवेल की पहले से पहचान कर उन्हें सुरक्षित तरीके से बंद किया जाना चाहिए, ताकि इस तरह के हादसों को रोका जा सके। प्रशासन और बचाव दलों की तमाम कोशिशों के बावजूद बच्ची को नहीं बचाया जा सका। घटना ने खुले और पुराने बोरवेल की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है।


