– 40 किमी प्रति घंटे की हवाओं ने बढ़ाई मुसीबत
– 150 गांवों में 38 घंटे से बिजली बंद
कंपिल, फर्रुखाबाद। कंपिल और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार करीब 65 घंटे से हो रही बारिश और 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही तेज हवाओं ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। बारिश और आंधी के कारण कंपिल व सिवारा विद्युत उपकेंद्र से जुड़े करीब 150 गांवों में लगभग 38 घंटे से बिजली आपूर्ति ठप है। लगातार बिजली न आने से ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बिजली आपूर्ति बाधित होने से घरों में लगे विद्युत उपकरण शोपीस बनकर रह गए हैं। मोबाइल फोन चार्ज करने से लेकर पेयजल की व्यवस्था तक प्रभावित हुई है। नगरवासियों शिवम, आलोक प्रजापति, प्रदीप, सद्दाम हुसैन, सुरेंद्र, विवेक, अखिलेश और नीरज सहित कई लोगों ने बताया कि बिजली न होने के कारण उन्हें अंधेरे में रात गुजारनी पड़ी। लगातार बारिश के बीच बिजली की समस्या ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है।
विद्युत उपकेंद्र कंपिल के अवर अभियंता रविंद्र प्रताप ने बताया कि तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर पेड़ गिर गए, जिससे विद्युत खंभे क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इसके चलते बड़े क्षेत्र में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। विद्युत विभाग की टीमें क्षतिग्रस्त लाइनों और खंभों की मरम्मत में जुटी हैं। उन्होंने बताया कि कार्य पूरा होने के बाद ही बिजली आपूर्ति पूरी तरह बहाल की जा सकेगी।
लगातार बारिश से खेतों में पानी भर गया है। तेज हवाओं के कारण अगेती धान, बाजरा और तिल की फसलों को नुकसान पहुंचा है। कई खेतों में फसलें जमीन पर बिछ गई हैं। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
ग्राम कटिया निवासी किसान अंसार खान ने बताया कि खेतों में पानी भरने और फसल के जमीन पर गिर जाने से दाने अंकुरित होने तथा फसल के सड़ने का खतरा पैदा हो गया है। किसानों का कहना है कि यदि बारिश और जलभराव का सिलसिला जारी रहा तो नुकसान और बढ़ सकता है।
किसानों ने प्रशासन से प्रभावित गांवों में फसलों का स्थलीय सर्वे कराने और नुकसान का आकलन कराकर नियमानुसार मुआवजा दिलाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार बारिश से पहले ही खेती प्रभावित है और अब तेज हवाओं ने तैयार होती फसलों को भी नुकसान पहुंचाया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से बिजली गुल होने के कारण लोगों की निगाहें विद्युत विभाग की मरम्मत टीमों पर टिकी हैं। बारिश के बीच बिजली आपूर्ति कब तक सामान्य होगी, इसे लेकर ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है।


