लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आंधी और मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। बीते दो दिनों में बारिश और तेज हवाओं से 60 लोगों की मौत की सूचना है। लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, बाराबंकी, अयोध्या, जौनपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में लगातार करीब 65 घंटे तक बारिश हुई। तेज हवाओं के कारण हजारों पेड़ और बिजली के पोल उखड़ गए, जबकि खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूब गईं।
लखनऊ में 26 सितंबर को सितंबर महीने में एक दिन में 135.8 मिमी बारिश दर्ज की गई। कानपुर में 24 घंटे में 175.4 मिमी बारिश हुई, जो 1981 के बाद सितंबर में एक दिन की सबसे अधिक बारिश बताई गई है। प्रदेश के 22 जिलों में अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। कई शहरों में सड़कें तालाब बन गईं और घरों-दुकानों में पानी घुस गया।
फर्रुखाबाद में भी भारी बारिश से हालात बिगड़े। जिले में शनिवार को 196.06 मिमी बारिश दर्ज की गई। शहर के कई इलाकों में एक से तीन फीट तक पानी भर गया। लोहिया अस्पताल के पुरुष और महिला अस्पताल परिसर में भी बारिश का पानी घुस गया। वहीं कन्नौज में घरों और दुकानों में पानी भरने से व्यापारियों को दुकानें बंद करनी पड़ीं।
कुशीनगर में गंडक नदी के उफान के बाद बैराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए। कई गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। उन्नाव में गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है और गंगा एक्सप्रेसवे के सोनिक टोल प्लाजा के पास दो से तीन फीट पानी भर गया। लखीमपुर, सीतापुर, बहराइच, गोरखपुर, देवरिया और चंदौली समेत कई जिलों में पेड़ गिरने, मकान ढहने और जलभराव की घटनाएं सामने आई हैं।
बारिश से सबसे ज्यादा मार किसानों पर पड़ी है। लखनऊ, मेरठ, बहराइच समेत कई जिलों में धान, केला और अन्य फसलें खेतों में गिरकर पानी में डूब गई हैं। कई जगह सड़कें और संपर्क मार्ग बाधित हैं। देवरिया में पेड़ गिरने से रेलवे के ओएचई केबल में आग लगने के कारण करीब पांच घंटे तक ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहा।
खराब मौसम के चलते एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की श्रावस्ती में प्रस्तावित जनसभा भी स्थगित कर दी गई है। अब यह जनसभा 4 अक्टूबर को आयोजित होने की जानकारी दी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोगों से बेवजह घर से बाहर न निकलने और सावधानी बरतने की अपील की है। मौसम विभाग के अनुसार 28 सितंबर से बारिश में कमी आने और अक्टूबर की शुरुआत में मौसम साफ होने के संकेत हैं।


