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नीम करोरी धाम से संकिसा और कम्पिल तक पर्यटन विकास की नई संभावनाओं पर मंथन
फर्रुखाबाद। पांचाल की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने तथा जनपद में पर्यटन की संभावनाओं को विस्तार देने के उद्देश्य से विश्व पर्यटन दिवस पर पांचाल शोध एवं विकास समिति की ओर से बेवर रोड स्थित संध्या पैलेस में गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें जिले के पौराणिक स्थलों के विकास, पर्यटन सुविधाओं के विस्तार और स्थानीय उद्योगों को पर्यटन से जोड़ने पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने पर्यटन विभाग की ओर से धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के सौंदर्यीकरण और बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए समिति के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता तथा पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह सोमवंशी ने कहा कि पांचाल की पवित्र भूमि अपने भीतर गौरवशाली इतिहास और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत समेटे हुए है। यहां धार्मिक, ऐतिहासिक और पौराणिक स्थलों की भरमार है, जिन्हें उचित प्रचार-प्रसार और बेहतर सुविधाओं के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जा सकती है। उन्होंने जनपद के पर्यटन ढांचे को मजबूत करने के लिए पर्यटन विभाग की ओर से संचालित विकास योजनाओं की सराहना की।
भूपेंद्र प्रताप सिंह ने जिले के प्रमुख पर्यटन केंद्रों बाबा नीब करोरी धाम, बौद्ध तीर्थस्थल संकिसा, महाभारत कालीन नगरी कम्पिल और महर्षि श्रृंगी ऋषि की तपोस्थली श्रृंगीरामपुर का उल्लेख करते हुए कहा कि इन स्थलों का सौंदर्यीकरण, जीर्णोद्धार और श्रद्धालुओं के लिए नागरिक सुविधाओं का विस्तार पर्यटन विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
वक्ताओं ने कहा कि संकिसा जैसे अंतरराष्ट्रीय बौद्ध स्थल और बाबा नीब करोरी धाम में श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सड़क, आवागमन, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास आवश्यक है। इन धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों को एक व्यवस्थित पर्यटन परिपथ से जोड़ने से जिले में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
गोष्ठी में स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक उद्योगों को पर्यटन के माध्यम से नई पहचान दिलाने पर भी विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत फर्रुखाबाद की प्रसिद्ध जरदोजी और ब्लॉक प्रिंटिंग को पर्यटन गतिविधियों से जोड़कर स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को नए अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। इसके साथ ही एक जिला एक व्यंजन योजना को भी पर्यटन से जोड़ने का सुझाव दिया गया। इससे बाहर से आने वाले पर्यटकों को जिले के पारंपरिक खानपान, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों से परिचित होने का अवसर मिलेगा। स्थानीय उत्पादों की बिक्री बढ़ने से कारीगरों, छोटे व्यापारियों और स्थानीय उद्यमियों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती मिल सकती है।
समिति के सदस्यों ने जनपद में कृषि एवं पर्यावरण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख नर्सरियों को पर्यटन परिपथ से जोड़ने का सुझाव दिया। वक्ताओं का कहना था कि नर्सरी भ्रमण के माध्यम से पर्यटक पौधों, बागवानी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों को करीब से समझ सकेंगे। इस पहल से स्थानीय नर्सरी संचालकों को भी अपनी गतिविधियों के विस्तार का अवसर मिलेगा। साथ ही पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण में समय बिताने और स्थानीय कृषि उत्पादों एवं पौधों की जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिल सकेगा।
गोष्ठी में कहा गया कि फर्रुखाबाद की ऐतिहासिक विरासत, धार्मिक आस्था, पारंपरिक हस्तशिल्प और प्राकृतिक संसाधनों को एक साथ जोड़कर पर्यटन विकास की व्यापक संभावनाएं तैयार की जा सकती हैं। इससे जिले की पहचान को नई दिशा मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
कार्यक्रम में भानु प्रकाश मिश्रा, अनिल प्रताप सिंह, एमआर पाल, कैप्टन डीएस राठौर, डॉ. मुकेश सिंह राठौर, भूपेंद्र प्रताप सिंह, शरद चंदेल, आकिब खां, राजीव बाजपेयी, अनिल ददुआ, सत्यपाल सिंह, केके वर्मा, प्रदीप कुमार और प्रधानाचार्य अनिल सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
पांचाल की ऐतिहासिक धरोहरों को वैश्विक पहचान दिलाने में जुटा पर्यटन विभाग


