शरद कटियार
समाज और राष्ट्र के निर्माण में सेवा की भूमिका हमेशा से महत्वपूर्ण रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संदेश कि “सेवा करते-करते ही सेवा का संदेश दें, उपदेश नहीं” दरअसल सार्वजनिक जीवन के लिए एक व्यापक विचार प्रस्तुत करता है। सेवा तभी प्रभावी दिखाई देती है, जब वह भाषणों और नारों से निकलकर व्यवहार और कार्यों में दिखाई दे।
आज युवाओं के सामने देश की विविधता को समझने और समाज की वास्तविक चुनौतियों से जुड़ने का अवसर है।
गांवों में जाकर लोगों से संवाद करना, उनकी समस्याओं को सुनना, स्वच्छता, पर्यावरण, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता से जुड़े कार्यों में भाग लेना युवाओं को जमीन की वास्तविकता से परिचित करा सकता है। इससे सेवा केवल एक कार्यक्रम न रहकर सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा बन सकती है।
सेवा यात्राओं का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि इनके माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभवों को एक-दूसरे तक पहुंचाया जा सकता है। किसी गांव में सफल हुआ कोई प्रयोग दूसरे गांव के लिए उपयोगी बन सकता है। इसलिए ऐसी गतिविधियों का दस्तावेजीकरण और अनुभवों का आदान-प्रदान भी उतना ही जरूरी है।
राजनीति और शासन व्यवस्था में सेवा-भाव की चर्चा नई नहीं है। लोकतंत्र में जनता ही केंद्र में होती है और सरकारी योजनाओं की वास्तविक सफलता इसी बात से तय होती है कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक कितना पहुंचता है। गरीबों, किसानों, महिलाओं, युवाओं और जरूरतमंदों के लिए संचालित योजनाओं का उद्देश्य भी तभी सार्थक माना जाएगा, जब उनका लाभ बिना भेदभाव के पात्र लोगों तक पहुंचे।
युवाओं के लिए सेवा का अर्थ केवल किसी अभियान में भाग लेना नहीं, बल्कि अपने आसपास की समस्याओं के प्रति संवेदनशील होना भी है। किसी जरूरतमंद की सहायता करना, सार्वजनिक स्थान को स्वच्छ रखना, पर्यावरण संरक्षण में योगदान देना, शिक्षा के लिए किसी बच्चे की मदद करना या समाज में जागरूकता फैलाना,ये सभी सेवा के रूप हैं।
भारत की परंपरा में “सेवा परमो धर्मः” का भाव इसी विचार को मजबूत करता है कि समाज के प्रति जिम्मेदारी केवल किसी विशेष अवसर तक सीमित नहीं होनी चाहिए। सेवा यदि निरंतर जीवन-व्यवहार का हिस्सा बन जाए तो उसके लिए अलग से उपदेश देने की आवश्यकता ही नहीं रहती।
आज आवश्यकता ऐसे सार्वजनिक जीवन की है, जहां बात कम और काम अधिक दिखाई दे। सेवा की असली पहचान मंच पर बोले गए शब्दों से नहीं, बल्कि उस व्यक्ति के कार्यों से होती है, जिसके जीवन में समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी वास्तविक रूप से दिखाई देती है। यही सेवा का सबसे प्रभावी संदेश भी है।


