शमशाबाद, फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन ने 13 सूत्रीय मांगों पर हुए समझौते को लागू न किए जाने पर नाराजगी जताई है। यूनियन की ओर से मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को ज्ञापन सौंपकर समझौते को तत्काल लागू करने और लंबे समय से लंबित प्रोत्साहन राशि का भुगतान कराने की मांग की गई।
ज्ञापन में कहा गया कि 7 फरवरी 2026 को स्वास्थ्य मंत्री और यूनियन के पदाधिकारियों के बीच 13 सूत्रीय मांगों पर सहमति बनी थी। इसमें आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में राज्यांश को 1500 रुपये से बढ़ाकर 7500 रुपये करने, मासिक अवकाश देने, जीवन बीमा की राशि दो लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने और स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराने की मांग शामिल थी। इसके अलावा कैशलेस योजना के तहत पांच लाख रुपये का अतिरिक्त लाभ देने तथा छह वर्षों से बकाया प्रोत्साहन राशि का भुगतान करने पर भी सहमति बनी थी।
यूनियन ने बताया कि मांगों पर विचार के लिए अपर प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद भी अंतिम बैठक नहीं बुलाई गई है। इससे आशा कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि आयुष्मान कार्ड और गोल्डन कार्ड बनाने के लिए वर्ष 2018 से अब तक प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं किया गया है। कोविड-19 के दौरान घोषित एक हजार रुपये प्रतिमाह की राशि भी नहीं मिली है।
इसके अलावा कुष्ठ रोग, टीबी, रेबीज, फाइलेरिया, नसबंदी, अमृत आईडी, उच्च रक्तचाप, संचारी रोग, टीबी स्क्रीनिंग, पोलियो और जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) सहित विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों की प्रोत्साहन राशि भी लंबे समय से लंबित बताई गई है।
आशा कार्यकर्ताओं ने शासन से मांग की कि 13 सूत्रीय समझौते को तत्काल लागू किया जाए और सभी लंबित प्रोत्साहन राशि का भुगतान अविलंब कराया जाए।
13 सूत्रीय समझौता लागू न होने से आशा कार्यकर्ताओं में आक्रोश, सीएमओ को सौंपा ज्ञापन


