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Thursday, September 24, 2026

आर्मी पब्लिक स्कूल के 41 विद्यार्थियों ने किया ठोस अवशिष्ट प्रबंधन संयंत्र का शैक्षिक भ्रमण

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– कचरे के पृथक्करण और रिसाइक्लिंग की प्रक्रिया समझी
– प्लास्टिक के दाने व कम्पोस्ट खाद बनाने की ली जानकारी

फर्रुखाबाद। स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आर्मी पब्लिक स्कूल के कक्षा 11 के 41 छात्र-छात्राओं ने नौगवां स्थित ठोस अवशिष्ट प्रबंधन संयंत्र का शैक्षिक भ्रमण किया। छावनी बोर्ड द्वारा वर्ष 2018 में स्थापित इस संयंत्र में विद्यार्थियों ने कचरे के निस्तारण और रिसाइक्लिंग की विभिन्न प्रक्रियाओं को करीब से समझा।
संयंत्र के प्रभारी यशवंत सिंह एवं एएसआई विक्रम सिंह ने विद्यार्थियों को विभिन्न मशीनों के संचालन और कचरे से उपयोगी सामग्री तैयार किए जाने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संयंत्र में रिसाइक्लिंग की प्रक्रिया के माध्यम से प्लास्टिक से दाने और जैविक कचरे से कम्पोस्ट खाद तैयार की जाती है, जबकि अनुपयोगी अवशिष्ट का इस्तेमाल भूमि भराव के लिए किया जाता है।
चार श्रेणियों में अलग करना होगा कचरा,विद्यार्थियों को कचरे के उचित पृथक्करण की जानकारी देते हुए बताया गया कि 1 अप्रैल 2026 से लागू नए नियमों के अनुसार चार प्रकार के कचरे को अलग-अलग रखना अनिवार्य है।
गीला अवशिष्ट: किचन वेस्ट, बचा हुआ खाना, फल एवं सब्जियों के छिलके आदि।
सूखा कचरा: प्लास्टिक, पेपर, धातु, कांच आदि।
सैनेटरी कचरा: डायपर, सैनेटरी पैड और स्वच्छता से जुड़े अन्य अवशिष्ट।
स्पेशल केयर कचरा: बैटरी, बल्ब, दवाइयां और केमिकल से संबंधित कचरा।
उन्हें बताया गया कि घर, दुकान अथवा किसी भी संस्था में कचरे को इन श्रेणियों के अनुसार अलग-अलग करना जरूरी है। नियमों का पालन नहीं करने पर जुर्माने का प्रावधान भी हो सकता है।
विद्यालय की प्रधानाचार्या सोनिया शर्मा ने बताया कि 24 सितंबर से विद्यालय में स्वच्छता पखवारा मनाया जा रहा है। इसके तहत विद्यार्थियों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के साथ ही समाज में जागरूकता फैलाने के लिए स्वच्छता रैली, नुक्कड़ नाटक, सफाई अभियान और वृक्षारोपण सहित विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
विद्यालय के उपप्रधानाचार्य नितिन चतुर्वेदी ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षिक भ्रमण से विद्यार्थियों में पर्यावरण और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ती है। साथ ही उनमें समाज सेवा की भावना विकसित होती है और उन्हें अपने सामाजिक दायित्वों एवं कर्तव्यों की जानकारी मिलती है।
शैक्षिक भ्रमण को सफल बनाने में वीरेंद्र कुमार मिश्र, डॉ. राजेश पाण्डेय, प्रदीप कुमार गोले, अपर्णा चौधरी, उमा त्रिवेदी, ब्रजवाला, सुरेंद्र सिंह, अमितेश पाठक और राम सागर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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