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Wednesday, September 23, 2026

लाल किले में आईएनए शहीद स्मारक की मांग, दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल

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नई दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय सेना (आईएनए ) के शहीदों की स्मृति में लाल किले में डेडिकेटेड मेमोरियल स्थापित किए जाने की मांग को लेकर महन स्वतंत्रता सेनानी लालती राम ट्रस्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर की गई है।

याचिका में हाईकोर्ट से मांग की गई है कि केंद्र सरकार के संबंधित अधिकारियों को लाल किले में आईएनए शहीद स्मारक स्थापित करने के लिए आवश्यक और शीघ्र कदम उठाने के निर्देश दिए जाएं। याचिका में स्मारक के निर्माण को विरासत, पुरातात्विक संरक्षण, सुरक्षा और अन्य वैधानिक आवश्यकताओं के अधीन रखने की बात कही गई है।
याचिका का प्रमुख आधार 2 अगस्त 2021 का केंद्र सरकार का संसदीय जवाब है। याचिकाकर्ता के अनुसार, संस्कृति मंत्रालय ने लोकसभा में बताया था कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस से संबंधित विभिन्न प्रस्तावों को मंजूरी दी गई थी, जिनमें “रेड फ़ोर्ट में INA martyrs के लिए मेमोरियल स्थापित करना” भी शामिल था। याचिका में कहा गया है कि इसके बावजूद 2026 तक लाल किले में अलग आईएनए शहीद स्मारक स्थापित नहीं हुआ है।
याचिका के अनुसार, 2026 में भी इस प्रस्ताव के आधार पर कोई डेडिकेटेड INA Martyrs’ मेमोरियल स्थापित होना ज्ञात नहीं है। इसी को लेकर ट्रस्ट ने हाईकोर्ट से उचित दिशा-निर्देश और प्रस्ताव के कानून के अनुसार क्रियान्वयन की मांग की है।
याचिका में कहा गया है कि लाल किले में 1945-46 में आईएनए से जुड़े ऐतिहासिक मुकदमे चले थे। शाहनवाज खान, प्रेम सहगल और गुरबख्श सिंह ढिल्लों सहित आईएनए अधिकारियों के मुकदमों ने स्वतंत्रता आंदोलन के अंतिम चरण में व्यापक जनध्यान आकर्षित किया था।
याचिका में कहा गया है कि 23 जनवरी 2019 को लाल किले में नेताजी सुभाष चंद्र बोस संग्रहालय का उद्घाटन किया गया था। याचिकाकर्ता का तर्क है कि संग्रहालय और शहीद स्मारक दोनों की भूमिका अलग है,संग्रहालय इतिहास को संरक्षित एवं प्रदर्शित करता है, जबकि स्मारक शहीदों के स्थायी सम्मान और स्मरण का स्थान होता है।
मामले में संघ सरकार के संस्कृति मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को प्रतिवादी बनाया गया है।
याचिका में कहा गया है कि ट्रस्ट लाल किले में स्मारक की जगह, डिजाइन या निर्माण की तकनीकी प्रक्रिया स्वयं तय कराने की मांग नहीं कर रहा है, बल्कि संबंधित सक्षम अधिकारियों को कानून के अनुरूप आवश्यक कदम उठाने का निर्देश देने की मांग कर रहा है।

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