2047 के विजन पर होगा महामंथन
दो दिन चलेगा चिंतन शिविर
मंत्रालयों के कामकाज, योजनाओं की प्रगति और आगामी सुधारों पर समीक्षा,
मंत्रियों से मांगी जाएगी आगे की कार्ययोजना
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिपरिषद का दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ बुधवार से शुरू हो गया। 23 और 24 सितंबर को आयोजित इस बैठक में सरकार के अब तक के कामकाज की समीक्षा के साथ ‘विकसित भारत@2047’ के लक्ष्य को लेकर आगामी योजनाओं, सुधारों और प्राथमिकताओं पर मंथन किया जा रहा है। बैठक सेवा तीर्थ में हो रही है और इसमें केंद्रीय मंत्रिपरिषद के सदस्य शामिल हैं।
चिंतन शिविर को सरकार की मध्यावधि समीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। इसमें अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों के कामकाज, योजनाओं के क्रियान्वयन और अब तक हासिल परिणामों का जायजा लिया जाएगा। मंत्रियों के समूह अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े काम और आगे की कार्ययोजना पर प्रस्तुतियां देंगे। इसके बाद सरकार की अगली प्राथमिकताओं और सुधारों को लेकर चर्चा होगी।
बैठक में विकसित भारत@2047, सुशासन, ईज ऑफ लिविंग, सरकारी प्रक्रियाओं में अनावश्यक अनुपालनों को कम करने और जनसेवा को बेहतर बनाने जैसे मुद्दों पर विशेष जोर रहेगा। सचिवों के समूहों, मंत्रालयों एवं विभागों, कैबिनेट सचिवालय और नीति आयोग के काम को भी एक साथ रखकर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।
सरकारी स्तर पर तैयारियों के तहत मंत्रियों के अलग-अलग समूहों ने पहले से बैठकें की हैं। चिंतन शिविर में केवल मौजूदा योजनाओं की समीक्षा ही नहीं, बल्कि अगले चरण के सुधारों और नीतिगत प्राथमिकताओं पर भी विचार किया जाएगा। सरकार की ओर से इसे विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए रोडमैप को और स्पष्ट करने की प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है।
2021 में भी हुआ था चिंतन सत्र
मोदी सरकार इससे पहले सितंबर 2021 में भी मंत्रिपरिषद का चिंतन सत्र आयोजित कर चुकी है। उस दौरान मंत्रियों के कामकाज, कार्यकुशलता, समय एवं संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, योजनाओं की निगरानी और शासन सुधार जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी। मौजूदा चिंतन शिविर उसी तरह की समीक्षा प्रक्रिया को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण आयोजन है।
विकसित भारत@2047 का लक्ष्य भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दीर्घकालिक परिकल्पना से जुड़ा है। प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त 2022 को लाल किले से इस लक्ष्य का उल्लेख करते हुए अगले 25 वर्षों के लिए देश के विकास की दिशा सामने रखी थी। मौजूदा चिंतन शिविर में इसी दीर्घकालिक लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार के वर्तमान कामकाज और भविष्य की रणनीति को जोड़ने पर जोर है।


