नई दिल्ली। दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत के समक्ष ड्राफ्ट मतदाता सूची से करीब 47 लाख नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल रखे।
सुनवाई के दौरान बताया गया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं को ‘शिफ्टेड’, ‘अनमैप्ड’ और ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ जैसी श्रेणियों के आधार पर नोटिस जारी किए गए हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से यह मांग भी उठाई गई कि नोटिस पाने वाले मतदाताओं के नाम और उन्हें नोटिस दिए जाने के कारण स्पष्ट रूप से सार्वजनिक किए जाएं।
निर्वाचन आयोग की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि दिल्ली में एसआईआर प्रक्रिया के लिए करीब 14,000 बूथ लेवल अधिकारी तैनात हैं। प्रक्रिया में ईआरओ समेत निर्वाचन अधिकारियों की भी तैनाती की गई है।
आयोग की ओर से अदालत में यह भी कहा गया कि किसी भी व्यक्ति का नाम केवल नोटिस जारी होने से मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा। नाम हटाने से पहले संबंधित मतदाता को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा और आदेश कारणयुक्त तथा अपील योग्य होगा।
दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची 31 अगस्त 2026 को प्रकाशित हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार करीब 47.7 लाख नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं किए गए, जबकि दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 सितंबर है।


