23 से 25 सितंबर तक दोबारा बारिश के आसार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मानसून की विदाई के बीच बारिश ने कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित कर दिया है। लखनऊ से सटे सीतापुर में स्थानीय नदियां उफान पर हैं। कई छोटे पुलों के ऊपर से पानी बह रहा है और सड़कें जलमग्न हैं। आधा दर्जन गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है। ग्रामीण ट्रैक्टरों के सहारे आवाजाही कर रहे हैं, जबकि खेतों में खड़ी फसलें भी पानी की चपेट में आ गई हैं।
बुंदेलखंड के महोबा में रिकॉर्ड बारिश के बाद छह प्रमुख बांध पूरी क्षमता तक भर गए हैं। अर्जुन, कबरई, उर्मिल, चंद्रावल, मझगवां और लहचूरा बांध लबालब हैं। जिले में अब तक 968 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज हुई है, जो सामान्य औसत 565 मिलीमीटर से करीब 70 फीसदी अधिक है। कबरई बांध का जलस्तर अधिकतम सीमा को भी पार कर गया है।
ललितपुर में गोविंद सागर बांध में पानी की आवक बढ़ने के बाद चार गेट दो-दो फीट खोलकर 1152 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। वहीं गोंडा में घाघरा नदी के कटान से चार गांव प्रभावित हैं। वाराणसी में गंगा का जलस्तर घटने लगा है। पानी कम होने के बाद घाटों के निचले हिस्से दिखाई देने लगे हैं, लेकिन बाढ़ के बाद जमा सिल्ट हटाने की चुनौती बनी हुई है।
मौसम विभाग के मुताबिक पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी शुरू हो चुकी है। हालांकि बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में बने नए मौसम तंत्र के प्रभाव से 23 से 25 सितंबर के बीच प्रदेश में दोबारा बारिश का दौर शुरू होने के आसार हैं। रविवार को लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज समेत कई शहरों में मौसम अपेक्षाकृत साफ रहा, लेकिन बादलों की आवाजाही बनी रही।
मौसम के बदलते मिजाज के बीच किसानों की चिंता भी बढ़ी है। सितंबर के आखिर में बारिश की स्थिति रबी फसलों की बुआई के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मौसम विशेषज्ञों ने गेहूं, चना और सरसों की बुआई पर मौसम के असर की आशंका जताई है। फिलहाल प्रदेश के छह जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है और प्रशासन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए है।


