चायवाले के नाम रजिस्ट्रेशन, चपरासी को बनाया फैकल्टी
सैकड़ों छात्रों से करीब दो करोड़ ऐंठे
एटा। जिले में चार साल से संचालित हो रहे कथित फर्जी बीएस मेडिकल कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी के नेटवर्क का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। मारहरा पुलिस ने मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार गिरोह ने एटा, कासगंज, अलीगढ़, आगरा और हाथरस के छात्रों को विभिन्न मेडिकल एवं पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश का झांसा देकर रकम वसूली और फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज तैयार किए।
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब कॉलेज संचालक सतेंद्र कुमार ने अपने ही अपहरण और दो लाख रुपये की फिरौती मांगे जाने की झूठी सूचना दिलाई। पुलिस जांच में उसकी लोकेशन आगरा में मिली, जहां से उसे सकुशल बरामद किया गया। पूछताछ में कथित अपहरण की कहानी फर्जी निकली। पुलिस के मुताबिक छात्रों से लिए गए रुपये लौटाने के दबाव में उसने यह साजिश रची थी। इसके बाद पुलिस ने कॉलेज की जांच शुरू की तो फर्जीवाड़े की परतें खुलती चली गईं।
पुलिस ने कॉलेज से फर्जी मार्कशीट, आईडी कार्ड, प्रवेश फार्म, हाजिरी शीट, परीक्षा पुस्तिकाएं, जाली प्रश्नपत्र, फीस रसीदें, मोहर, लेटर पैड, लैपटॉप और चार बैंकों के फर्जी चेक समेत बड़ी मात्रा में सामग्री बरामद की है। यहां बीफार्मा, डीफार्मा, बीएससी नर्सिंग, बीएएमएम, जीएनएम, एएनएम, डीएमएमटी और बीएमएलटी समेत कई पाठ्यक्रम संचालित किए जाने का दावा किया जा रहा था। इस सत्र में 54 विद्यार्थियों के पंजीकरण की जानकारी सामने आई है।
जांच में यह भी सामने आया कि जिस बीएस नामक व्यक्ति के नाम पर कॉलेज का पंजीकरण दिखाया गया, वह वास्तव में चाय बेचता है। पुलिस ने सतेंद्र कुमार उर्फ कृष्णपाल, गौरव अग्रवाल, भगवान दास, नरेंद्र उर्फ पप्पू और मोहम्मद शरीफ कुरैशी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार गौरव अग्रवाल के पिता सेवानिवृत्त सीएमओ हैं और गौरव कॉलेज के संचालन से जुड़ा था।
फर्जीवाड़े का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि कथित फैकल्टी को महज 300 रुपये की दिहाड़ी पर रखा गया था। गिरफ्तार मोहम्मद शरीफ ने पुलिस पूछताछ में खुद को प्रोफेसर या शिक्षक नहीं, बल्कि चपरासी बताया। इसके बावजूद दस्तावेजों में उसका नाम फैकल्टी के रूप में दर्ज था। एक 75 वर्षीय व्यक्ति को भी कागजों में फैकल्टी दर्शाए जाने की बात पुलिस ने बताई है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस फर्जी संस्थान में अब तक कितने छात्रों से कितनी रकम वसूली गई और जारी किए गए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कहां-कहां हुआ। पुलिस के अनुसार पहले भी वर्ष 2025 में फीस लेकर डिग्री नहीं देने से संबंधित दो मामले दर्ज हुए थे, जिनमें आरोप-पत्र दाखिल किया जा चुका है। एएसपी श्वेताभ पांडेय ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट समेत अन्य कार्रवाई की जाएगी और अवैध संपत्ति का पता लगाकर कुर्की की कार्रवाई भी की जाएगी।


