– न्यायिक कार्य में हिंदी के व्यापक इस्तेमाल की मिसाल
– करीब छह साल में 27 हजार से अधिक मामलों का हिंदी में निस्तारण
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी ने न्यायिक कार्य में हिंदी के व्यापक इस्तेमाल की मिसाल कायम की है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक सितंबर 2025 तक अपने करीब छह वर्ष के कार्यकाल में उन्होंने 27,846 मामलों का निस्तारण हिंदी में किया। इस दौरान उनकी पीठ ने कुल 79,502 मामलों का निस्तारण किया, जिनमें 51,656 मामले हिंदी-अंग्रेजी मिश्रित भाषा में थे।
न्यायमूर्ति चौधरी ने 12 दिसंबर 2019 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। इसके बाद उन्होंने न्यायिक निर्णयों में हिंदी के प्रयोग को लगातार प्राथमिकता दी। 2024 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, उस समय तक वे हिंदी में 21 हजार से अधिक फैसले दे चुके थे।
न्यायमूर्ति चौधरी की अदालत में बड़ी संख्या में आपराधिक मामलों की सुनवाई हुई। सितंबर 2025 तक उन्होंने 34,597 आपराधिक विविध जमानत आवेदनों का निस्तारण किया, जिनमें 18,049 फैसले हिंदी में थे। धारा 482 से संबंधित 21,532 मामलों में भी 5,578 फैसले हिंदी में दिए गए।
हिंदी में फैसले देने का उनका यह सिलसिला इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायिक प्रक्रिया को आम लोगों की भाषा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
न्यायमूर्ति गौतम चौधरी का जोर केवल न्याय करने तक सीमित नहीं है, बल्कि न्याय को आम व्यक्ति तक उसकी समझ की भाषा में पहुंचाने पर भी रहा है। उनका मानना रहा है कि न्याय व्यवस्था जनता के लिए जितनी सहज और बोधगम्य होगी, उसका प्रभाव उतना ही व्यापक होगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में हिंदी में बहस और निर्णय देने की परंपरा लगातार मजबूत हुई है। न्यायमूर्ति चौधरी के अलावा अन्य न्यायमूर्तियों ने भी हिंदी में निर्णय दिए हैं। इससे उच्च न्यायालय की न्यायिक प्रक्रिया में भारतीय भाषाओं के प्रयोग को बढ़ावा मिला है।
न्यायमूर्ति चौधरी का यह रिकॉर्ड हिंदी दिवस के अवसर पर न्यायिक व्यवस्था में ‘जनता की भाषा में न्याय’ की अवधारणा को और मजबूती देता है।


