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फर्रुखाबाद। गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से अमृतपुर क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति विकट होती जा रही है। कई गांवों के संपर्क मार्ग पानी में डूब चुके हैं, जबकि निचले इलाकों में बने घरों और झोपड़ियों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। हालात इतने खराब हैं कि गांवों के अंत्येष्टि स्थल भी जलमग्न हो गए हैं। मंझा गांव में एक व्यक्ति की मौत के बाद परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए फखरपुर पुल के किनारे सड़क का सहारा लेना पड़ा।
तीसराम की मढ़ैया, आशा की मढ़ैया, उदयपुर, कंचनपुर, फखरपुर और मंझा की मढ़ैया समेत कई गांवों के संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी में डूबे हैं। रास्तों पर कई फीट पानी होने के कारण ग्रामीणों को जरूरी काम के लिए पानी में घुसकर निकलना पड़ रहा है। खेतों और आसपास के इलाकों में पानी भर जाने से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित है। ग्रामीणों को गांव से बाहर निकलने और खेतों तक पहुंचने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
जलस्तर बढ़ने के साथ कई स्थानों पर नाविकों के लिए भी पहुंचना मुश्किल हो गया है। ऐसे में उन ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है, जिनका आवागमन पूरी तरह नावों पर निर्भर है। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है, जबकि रामगंगा भी चेतावनी बिंदु पर है। लगातार बढ़ते पानी से ग्रामीणों में चिंता बढ़ती जा रही है।
अंत्येष्टि स्थल डूबा, पुल किनारे हुआ अंतिम संस्कार
मंझा निवासी कृष्ण कुमार अवस्थी का निधन होने के बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए अंत्येष्टि स्थल पहुंचे, लेकिन वहां पहले से ही बाढ़ का पानी भरा था। अंतिम संस्कार के लिए कोई सुरक्षित स्थान नहीं मिलने पर परिजनों ने फखरपुर पुल के किनारे सड़क पर ही चिता सजाई। बाढ़ की इस स्थिति ने ग्रामीणों के सामने खड़ी मुश्किलों को और गंभीर कर दिया है।
मंझा गांव में नन्ही, बालवीर और हनुमत के मकान भी बाढ़ के पानी से प्रभावित हुए हैं। वहीं माधुरी पत्नी रामसेवक की दो झोपड़ियां पानी के कटाव की चपेट में आकर बह गईं। सिर से छत छिन जाने के बाद वह पन्नी तानकर रहने को मजबूर हैं। बाढ़ ने उनके सामने रहने और खाने-पीने तक का संकट खड़ा कर दिया है।
एक महीने से पानी भरा, मकान की दीवार में आई दरार
ग्रामीण बलवीर ने बताया कि गांव में करीब एक महीने से पानी भरा हुआ है। लगातार जलभराव के कारण उनके मकान की एक दीवार चटक गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पानी जल्द नहीं उतरा तो कच्चे मकानों और झोपड़ियों के गिरने का खतरा बढ़ सकता है। कई परिवार लगातार दहशत में रह रहे हैं।
अमृतपुर एसडीएम श्वेता साहू ने बताया कि जिन गांवों में बाढ़ का पानी भर गया है, वहां ग्रामीणों के आवागमन के लिए नावें लगाई गई हैं। सभी नावों पर नाविक मौजूद हैं। राजस्व कर्मियों को प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने और ग्रामीणों की समस्याओं पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।


