– सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद विशेष न्यायालय का फैसला
– आरोप पत्र निरस्त होने के आधार पर बंद हुआ मुकदमा
फर्रुखाबाद। गैंगस्टर एक्ट से जुड़े मामले में अनुपम दुबे और शिव प्रताप सिंह उर्फ चीनू को राहत मिली है। विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट,अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालय संख्या-7 अंकित कुमार मित्तल की अदालत ने दोनों के खिलाफ चल रही विशेष सत्र वाद की कार्यवाही समाप्त कर दी। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के 20 अगस्त को पारित आदेश के अनुपालन में लिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने फतेहगढ़ कोतवाली में गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज मामले में दोनों आरोपियों के खिलाफ दाखिल आरोप पत्र को निरस्त कर दिया था। शीर्ष अदालत के इस आदेश के बाद विशेष न्यायालय के समक्ष भी मामले की आगे की कार्यवाही का आधार समाप्त हो गया। अदालत ने आदेश में माना कि जब आरोप पत्र ही निरस्त किया जा चुका है तो उसके आधार पर आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही जारी रखना उचित नहीं होगा।
इंस्पेक्टर हत्याकांड में मथुरा जिला जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे अनुपम दुबे की ओर से 24 अगस्त को विशेष न्यायालय में प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया गया था। इसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए उसी का लाभ दिए जाने और गैंगस्टर मामले की कार्यवाही समाप्त करने का अनुरोध किया गया था।
वहीं, सह-अभियुक्त शिव प्रताप सिंह उर्फ चीनू की ओर से पांच सितंबर को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की सत्य प्रतिलिपि विशेष न्यायालय में दाखिल की गई। दोनों पक्षों को सुनवाई के दौरान पहले ही सुना जा चुका था।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश और मामले से संबंधित अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद पाया कि शीर्ष अदालत द्वारा आरोप पत्र ही निरस्त किया जा चुका है। ऐसे में उसके आधार पर आगे की न्यायिक कार्यवाही चलाए रखने का कोई औचित्य नहीं बनता। इसके बाद विशेष न्यायालय ने अनुपम दुबे और शिव प्रताप सिंह उर्फ चीनू के खिलाफ चल रहे विशेष सत्र वाद को समाप्त करने का आदेश पारित कर दिया।
अदालत ने अनुपम दुबे के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 309 के तहत जारी वारंट को भी निरस्त कर दिया। साथ ही संबंधित परवाना मथुरा जिला जेल भेजने का आदेश दिया गया।
यह मामला फतेहगढ़ कोतवाली में अनुपम दुबे और शिव प्रताप सिंह उर्फ चीनू के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की धारा 2/3 के तहत दर्ज किया गया था। पुलिस ने मामले में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। मामले में सह-अभियुक्त संजीव पारिया की मृत्यु हो जाने के कारण उसके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया था।
अदालत ने 13 फरवरी 2025 को पुलिस द्वारा दाखिल आरोप पत्र का संज्ञान लेते हुए वाद दर्ज किया था। इसके बाद दो अगस्त 2025 को अनुपम दुबे और शिव प्रताप सिंह उर्फ चीनू के खिलाफ आरोप तय किए गए थे। मामला इसके बाद साक्ष्य की प्रक्रिया में पहुंच गया था।
गैंगस्टर एक्ट की इस कार्यवाही को शिव प्रताप सिंह उर्फ चीनू ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने 20 अगस्त को आदेश पारित करते हुए फतेहगढ़ कोतवाली में दोनों आरोपियों के खिलाफ दर्ज गैंगस्टर मामले में दाखिल आरोप पत्र को निरस्त कर दिया था। साथ ही उससे संबंधित न्यायिक कार्यवाही भी खत्म कर दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के इसी आदेश के आधार पर अब विशेष न्यायालय ने स्थानीय स्तर पर चल रही कार्यवाही को भी समाप्त कर दिया है। इस फैसले के साथ इस गैंगस्टर मामले में अनुपम दुबे और शिव प्रताप सिंह उर्फ चीनू के खिलाफ विशेष न्यायालय में लंबित कार्यवाही पर विराम लग गया है।


