फर्रुखाबाद। शमशाबाद क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित समेचीपुर चितार गांव में गंगा का कटान ग्रामीणों के लिए लगातार खतरा बनता जा रहा है। नदी की तेज धार तीन दिनों में छह मकानों को अपने आगोश में ले चुकी है। आंखों के सामने घर और जमीन नदी में समाते देख ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। खतरे को देखते हुए करीब आठ परिवार अपने घर खाली कर सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए हैं। परिवार नाव और स्टीमर के जरिए घर का जरूरी सामान निकालकर सुरक्षित जगह पहुंचा रहे हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, गंगा की तेज धारा ने सबसे पहले दिलदार का पक्का मकान अपनी चपेट में लिया। इसके बाद जुम्मन मियां, इमरान और इबली के मकान भी कटान का शिकार होकर नदी में समा गए। लगातार कटान होने से गांव के कई अन्य मकान भी नदी के बेहद करीब पहुंच गए हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि कटान की यही रफ्तार रही तो आने वाले दिनों में और मकान इसकी चपेट में आ सकते हैं।
आठ परिवारों ने खाली किए घर
कटान बढ़ने के बाद शाहनवाज, मैसाद, आसिफ, ईदुल, नस्तर अली, कमालुद्दीन, रशुद्दीन और इरशाद समेत करीब आठ परिवारों ने अपने घर खाली कर दिए हैं। परिवार अपने जरूरी सामान, घरेलू सामान और अन्य सामग्री को नाव व स्टीमर के जरिए सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। घर छोड़ने का दर्द ग्रामीणों के चेहरों पर साफ नजर आ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि नदी लगातार जमीन काट रही है। कई घर गंगा के बिल्कुल किनारे पहुंच चुके हैं। ऐसे में लोगों को रात-दिन यही डर सता रहा है कि कहीं उनका घर भी अचानक नदी में न समा जाए। ग्रामीणों ने प्रशासन से कटान रोकने के लिए तत्काल प्रभावी इंतजाम कराने की मांग की है।
ग्रामीण बोले- नहीं रुका कटान तो पूरा गांव खतरे में
ग्रामीणों का कहना है कि गंगा की धारा लगातार गांव की ओर बढ़ रही है। जिस तेजी से जमीन कट रही है, उससे केवल मकानों पर ही नहीं, बल्कि गांव के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है। लोगों का कहना है कि समय रहते बचाव कार्य शुरू नहीं हुआ तो बड़ी संख्या में मकान और जमीन नदी में समा सकती है।
लेखपाल ने पहुंचकर लिया जायजा
कटान की सूचना मिलने के बाद लेखपाल पंकज सिंह मौके पर पहुंचे और प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर कटान की स्थिति और प्रभावित परिवारों की जानकारी ली। अधिकारियों की ओर से प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद का भरोसा दिया गया है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि केवल निरीक्षण से समस्या का समाधान नहीं होगा। कटान रोकने और घरों को बचाने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की जरूरत है।


