नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री श्री चंद्रशेखर के राजनीतिक सलाहकार रहे एच.एन. शर्मा ने भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से मुलाकात कर समसामयिक संवैधानिक मुद्दों, मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति और संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की जन्म शताब्दी वर्ष की तैयारियों को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ।
मुलाकात के दौरान शर्मा ने कहा कि श्री चंद्रशेखर की संविधान के प्रति प्रतिबद्धता केवल एक कानूनी दस्तावेज के रूप में नहीं थी, बल्कि वे संविधान को राज्य और उसकी संस्थाओं के संचालन की जीवंत व्यवस्था मानते थे। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर जीवनभर संवैधानिक मर्यादाओं, संसदीय गरिमा, संस्थाओं के प्रति सम्मान और संवैधानिक पदों की प्रतिष्ठा बनाए रखने पर जोर देते रहे।
शर्मा ने कहा कि श्री चंद्रशेखर का दृढ़ विश्वास था कि संवैधानिक पद की गरिमा उस व्यक्ति से कहीं बड़ी होती है, जो उस समय उस पद पर बैठा हो। वे अक्सर कहा करते थे, “कुर्सी पर जो भी बैठा है, वह संवैधानिक अधिकार का प्रतिनिधित्व करता है।”
इसी संदर्भ में शर्मा ने न्यायपालिका में प्रचलित उस परंपरा का भी उल्लेख किया, जिसमें उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता जब किसी अधीनस्थ न्यायालय में पेश होते हैं तो पीठासीन न्यायाधीश को “माई लॉर्ड” कहकर संबोधित करते हैं। उन्होंने कहा कि यह किसी व्यक्ति के प्रति व्यक्तिगत सम्मान का विषय नहीं, बल्कि न्यायिक पद और उससे जुड़ी संवैधानिक सत्ता के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति है।
बैठक में श्री चंद्रशेखर के देशभर में व्यापक सामाजिक और राजनीतिक सरोकारों को भी याद किया गया। चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि संवैधानिक लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है, जब संस्थाएं गरिमा, संयम, पारस्परिक सम्मान और अपनी संवैधानिक मर्यादाओं के साथ काम करें।
श्री शर्मा और सॉलिसिटर जनरल के बीच हुई बातचीत में सार्वजनिक जीवन में संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने, संस्थाओं के प्रति विश्वास बढ़ाने और लोकतांत्रिक व्यवस्था की गरिमा बनाए रखने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।


