काठमांडू। नेपाल-तिब्बत सीमा पर 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने के बाद आई भीषण बाढ़ और मलबे की तबाही के 11 दिन बाद चीन ने पहली बार विदेशी मीडिया को प्रभावित क्षेत्र का दौरा कराया। चीनी विदेश मंत्रालय की अनुमति से रॉयटर्स समेत कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों के पत्रकार ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग पहुंचे और वहां जारी राहत एवं बचाव अभियान का जायजा लिया।
ग्यिरोंग पोर्ट पर बाढ़ इतनी भयावह थी कि चीन की पांच मंजिला कस्टम्स इमारत और करीब 20 मीटर ऊंचा बॉर्डर गेट तक मलबे में दब गया। पूरे इलाके में कीचड़ और मलबे का ढेर है। बचावकर्मी खुदाई मशीनों, फावड़ों और जमीन के नीचे तलाश करने वाले रडार से लोगों और शवों की खोज कर रहे हैं।
नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक, नेपाल में बाढ़ से मौतों का आंकड़ा 1355 पहुंच गया है। वहीं चीन की तरफ 43 मौतों की पुष्टि हुई है और 519 लोग अब भी लापता हैं। चीन के मुताबिक लापता लोगों में 23 देशों के 261 विदेशी नागरिक शामिल हैं, जिनमें 49 भारतीय भी हैं।
नेपाल के रसुवा में पांच हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में भी बचाव अभियान जारी है। नेपाली सेना के अनुमान के मुताबिक वहां करीब 121 लोग फंसे हो सकते हैं। भारत और नेपाल की टीमें चिलिमे सुरंग में भी लगातार तलाश कर रही हैं।
मलबे से मिले शवों की पहचान के लिए फिंगरप्रिंट, टैटू और निजी सामान का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। अब तक 993 निजी सामान मिले हैं। कई विदेशी नागरिकों के परिवार चीन से शवों की पहचान और जानकारी साझा करने की मांग कर रहे हैं। ग्यिरोंग बॉर्डर नेपाल-तिब्बत के बीच व्यापार और कैलाश यात्रा का प्रमुख रास्ता है, जिसे दोबारा बनाने पर चीन विचार कर रहा है।


