अमेरिका ने विरोध किया
नए मैप में अफ्रीका बड़ा, यूरोप-US छोटे
नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दुनिया के नक्शे को अधिक वास्तविक रूप में दिखाने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दी है। प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने मतदान किया, जबकि अमेरिका ने इसका विरोध किया। हालांकि इस बदलाव से किसी देश की सीमा या वास्तविक क्षेत्रफल पर कोई असर नहीं पड़ेगा, बल्कि नक्शे पर देशों और महाद्वीपों का आकार उनके वास्तविक क्षेत्रफल के अनुपात में ज्यादा सटीक दिखाई देगा।
अब तक दुनिया में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले मर्केटर नक्शे में ध्रुवों के पास स्थित क्षेत्र वास्तविक आकार से काफी बड़े नजर आते हैं। इसके मुकाबले नया इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन अफ्रीका जैसे महाद्वीपों का आकार अधिक वास्तविक दिखाता है। वहीं यूरोप और उत्तरी अमेरिका पहले की तुलना में छोटे नजर आएंगे।
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर अफ्रीका पर दिखाई देगा। मर्केटर नक्शे में अफ्रीका अपने वास्तविक आकार से काफी छोटा नजर आता है, जबकि नया प्रक्षेपण उसके क्षेत्रफल को अधिक सही अनुपात में दिखाएगा। ग्रीनलैंड इसका बड़ा उदाहरण है, जो पुराने नक्शे में दक्षिण अमेरिका के करीब-करीब बराबर दिखाई देता है, जबकि वास्तविकता में दक्षिण अमेरिका उससे कई गुना बड़ा है।
भारत के क्षेत्रफल और सीमाओं में कोई बदलाव नहीं होगा। हालांकि नए नक्शे में भारत की आकृति और आकार कुछ अलग दिखाई दे सकता है। उत्तरी देशों की तुलना में भारत अपेक्षाकृत बड़ा नजर आ सकता है। एशिया के कुछ हिस्सों के आकार में भी पुराने नक्शे के मुकाबले अंतर दिखाई देगा।
प्रस्ताव का अफ्रीकी संघ ने स्वागत किया है। अफ्रीकी देशों का कहना है कि नक्शा केवल भूगोल दिखाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह दुनिया के प्रति लोगों की सोच को भी प्रभावित करता है। उनका मानना है कि अफ्रीका का वास्तविक आकार लंबे समय से कम करके दिखाया जाता रहा है।
अमेरिका ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए इसे वैचारिक एजेंडा बताया। अमेरिकी प्रतिनिधि ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को दुनिया की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, न कि पुराने नक्शे को बदलने जैसी बहस पर। अमेरिका को छोड़कर अधिकांश देशों ने प्रस्ताव का समर्थन किया।
हालांकि संयुक्त राष्ट्र का यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। इसका मतलब है कि स्कूल, किताबें, कंपनियां या सरकारें मर्केटर नक्शे का इस्तेमाल बंद करने के लिए बाध्य नहीं होंगी। समुद्री और हवाई नेविगेशन में मर्केटर प्रक्षेपण का इस्तेमाल आगे भी जारी रह सकता है, क्योंकि दिशाओं को दर्शाने में यह उपयोगी माना जाता है।


