बाढ़ से अबतक 1344 मौतों से मचा हाहाकार, 5300 से ज्यादा लापता; त्रिशूली से बच्चे समेत 3 भारतीय सुरक्षित निकाले गए
काठमांडू/नई दिल्ली। नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं। देश में मृतकों की संख्या बढ़कर 1,344 पहुंच गई है, जबकि 5,300 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में अभियान चला रहे हैं। अब तक करीब 12 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
शनिवार को दार्चुला जिले में भारी भूस्खलन से चौलानी नदी का रास्ता प्रभावित हो गया। पहाड़ से बड़ी मात्रा में मिट्टी और पत्थर गिरने के बाद निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया गया। हालांकि बाद में नदी का बहाव सामान्य बताया गया। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आठ परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। घटना में किसी व्यक्ति या पशु की मौत की सूचना नहीं है।
इधर, त्रिशूली बाजार क्षेत्र में राहत-बचाव अभियान के दौरान पांच साल के बच्चे समेत तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया। विदेश मंत्रालय के अनुसार नेपाल में अब तक 169 भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है, जबकि 275 भारतीय अभी लापता हैं। त्रिशूली-3 ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग से भी दो मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता मिली है।
नेपाल में बाढ़ से 32,933 लोग प्रभावित हुए हैं। हजारों घरों के साथ स्कूल-कॉलेज, स्वास्थ्य केंद्र और परिवहन ढांचा भी प्रभावित हुआ है। करीब 55 किलोमीटर सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं, जबकि दर्जनों मोटरेबल और झूला पुल टूटने से कई इलाकों का संपर्क प्रभावित हुआ है। नुकसान का विस्तृत आकलन अभी जारी है।
भारत ने नेपाल के राहत अभियान में बड़े स्तर पर मदद बढ़ाई है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत अब तक सात विमानों के जरिए करीब 95 टन राहत सामग्री नेपाल भेज चुका है। इसके अलावा 54 विशेषज्ञों की टीमें भी भेजी गई हैं, जिनमें सुरंग बचाव विशेषज्ञ, फोरेंसिक विशेषज्ञ और मेडिकल टीम शामिल हैं। भारतीय दल नेपाल के अधिकारियों के साथ मिलकर राहत और बचाव कार्य में जुटे हैं।
चीन से भी 1,907 भारतीय नागरिक सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं। चीनी अधिकारियों के अनुसार तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में अब कोई भारतीय यात्री फंसा नहीं है। नेपाल में आपदा से हुए भारी नुकसान के बीच नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अर्जुन नरसिंह केसी ने नुकसान का अनुमान 800 अरब नेपाली रुपये से अधिक बताया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जलवायु न्याय तथा मुआवजे की मांग उठाई है।
नेपाल सरकार के सामने अब लापता लोगों की तलाश, प्रभावितों तक राहत पहुंचाने और क्षतिग्रस्त सड़कों-पुलों को बहाल करने की बड़ी चुनौती है। वहीं, नए भूस्खलनों की घटनाओं के कारण कई पहाड़ी और निचले इलाकों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।


