फर्जी दस्तावेजों से टेंडर हासिल करने के आरोप, चार करोड़ का कारोबार कागजों में 84 करोड़; मथुरा से कानपुर तक सवालों के घेरे में पूरा नेटवर्क
कानपुर। कानपुर नगर निगम में सामने आए कथित घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसके तार आगरा तक जुड़ते नजर आ रहे हैं। मामले में कथित मास्टरमाइंड गोविंद शर्मा आगरा का रहने वाला बताया जा रहा है, जबकि ठेकेदार रवि लवानिया भी आगरा निवासी है। आरोप है कि लवानिया सरकारी टेंडर हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेज और बैलेंस शीट का इस्तेमाल करता था।
सबसे गंभीर आरोपों में एक यह है कि जिस ठेकेदार का वास्तविक कारोबार करीब चार करोड़ रुपये बताया जा रहा था, उसके दस्तावेजों में कारोबार को बढ़ाकर करीब 84 करोड़ रुपये दर्शाया गया। यदि जांच में यह तथ्य सही साबित होता है तो यह केवल दस्तावेजी हेरफेर का मामला नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी निविदा प्रक्रिया की निगरानी और सत्यापन व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।
जांच के घेरे में आए रवि लवानिया पर आरोप है कि वह सरकारी ठेके हासिल करने के लिए फर्जी बैलेंस शीट और अन्य दस्तावेजों का सहारा लेता था। टेंडर प्रक्रिया में किसी कंपनी या ठेकेदार की वित्तीय क्षमता का आकलन उसके दस्तावेजों के आधार पर किया जाता है। ऐसे में यदि वित्तीय क्षमता को वास्तविकता से कई गुना अधिक दिखाकर ठेका हासिल किया गया, तो यह पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।
यही वजह है कि अब जांच एजेंसियों की नजर केवल ठेकेदार तक सीमित नहीं, बल्कि उन लोगों और अधिकारियों की भूमिका पर भी टिक सकती है जिन्होंने दस्तावेजों के आधार पर पात्रता को मंजूरी दी।
रवि लवानिया का नाम मथुरा नगर निगम से जुड़े विवादों में भी सामने आने की बात कही जा रही है। आरोप है कि वहां बिना काम कराए कथित मिलीभगत से भुगतान करा लिया गया।
यदि इन आरोपों की पुष्टि जांच में होती है तो सवाल और गंभीर हो जाता है कि अलग-अलग नगर निकायों में विवादों और कथित अनियमितताओं के बावजूद संबंधित ठेकेदार को दूसरे शहर में सरकारी काम कैसे मिलता रहा।
कथित घोटाले में नाम सामने आने के बावजूद रवि लवानिया के अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मामले में पुलिस की कार्रवाई और जांच की दिशा पर लोगों की नजर है।


