काठमांडू। नेपाल-तिब्बत सीमा पर 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी है। नेपाल में मृतकों की संख्या बढ़कर 675, जबकि तिब्बत में 7 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। करीब 3,000 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 287 भारतीय नागरिक शामिल हैं। आपदा के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
तबाही के तीन दिन बाद सामने आए वीडियो ने इस आपदा की भयावहता को और स्पष्ट कर दिया है। वीडियो में करीब 800 मीटर लंबा ग्लेशियर का हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ टूटकर घाटी में गिरता दिखाई दे रहा है। ग्लेशियर टूटने के बाद भारी मलबा और पानी तेजी से नीचे आया, जिससे भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ ने नेपाल-तिब्बत सीमा से लगे इलाकों को तबाह कर दिया।
दूसरी झील से मंडरा रहा नया खतरा
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में भूस्खलन से बनी दो झीलों ने अब नई चिंता पैदा कर दी है। वैज्ञानिकों के अनुसार दूसरी झील में लगातार पानी बढ़ रहा है। यदि उसका बांध टूटा तो निचले इलाकों में दोबारा बड़ी बाढ़ आ सकती है। प्रशासन और राहत एजेंसियां सैटेलाइट तस्वीरों और निगरानी उपकरणों से स्थिति पर नजर रख रही हैं।
287 भारतीय अभी भी लापता
भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार अब तक 88 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है, जबकि 287 भारतीयों का पता नहीं चल सका है। रसुवा के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से शनिवार को चार भारतीयों को भी सुरक्षित निकाला गया। छह भारतीय फॉरेंसिक टीमें डीएनए पहचान में मदद के लिए काठमांडू पहुंच रही हैं।
हाइड्रोपावर परियोजनाओं पर भी भारी असर
बाढ़ से भोटेकोशी और त्रिशूली घाटियों में 14 जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। इनमें छह निर्माणाधीन परियोजनाएं हैं। करीब 431 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता बंद हो गई है। वहीं 80 पुल और करीब 40 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त होने से कई इलाके देश के बाकी हिस्सों से कट गए हैं।
भारत की टीम भी राहत अभियान में जुटी
त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों की तलाश तेज कर दी गई है। सुरंग के ऊपरी हिस्से तक ड्रिलिंग में सफलता मिलने के बाद कैमरा और ऑक्सीजन अंदर भेजने की तैयारी है। भारतीय टीम भी मौके पर पहुंचकर हवाई सर्वे और बचाव अभियान में सहयोग कर रही है। नेपाल ने भारत की मदद के लिए आभार जताया है।
पुनर्निर्माण में लगेंगे अरबों डॉलर
नेपाल सरकार के अनुसार आपदा के बाद पुनर्वास और पुनर्निर्माण में अरबों डॉलर खर्च हो सकते हैं। सरकार नुकसान का विस्तृत आकलन कर रही है। वहीं संयुक्त राष्ट्र ने हजारों प्रभावित परिवारों के लिए भोजन और स्वच्छ पानी की तत्काल जरूरत बताई है।


