डॉ. विजय गर्ग
व्यायाम को आमतौर पर हृदय, मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए जाना जाता है। लेकिन वैज्ञानिकों को अब लगातार यह पता चल रहा है कि शारीरिक गतिविधि मस्तिष्क को कोशिकीय स्तर पर भी प्रभावित कर सकती है।
हाल के शोध से संकेत मिलता है कि व्यायाम से उत्पन्न होने वाले जैविक संकेत नए न्यूरॉन्स (तंत्रिका कोशिकाओं) के निर्माण को प्रोत्साहित कर सकते हैं। इस प्रक्रिया को न्यूरोजेनेसिस (Neurogenesis) कहा जाता है। यह खोज इस बात के बढ़ते प्रमाणों में शामिल है कि व्यायाम के लाभ केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं हैं।
इस शोध का एक रोचक पहलू मस्तिष्क की एस्ट्रोसाइट्स (Astrocytes) नामक कोशिकाओं से जुड़ा है। पहले इन कोशिकाओं को मुख्य रूप से सहायक कोशिकाएं माना जाता था, लेकिन अब वैज्ञानिक जानते हैं कि वे न्यूरॉन्स के साथ सक्रिय रूप से संवाद करती हैं और मस्तिष्क के वातावरण को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। शोधकर्ता यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि इन कोशिकाओं की गतिविधि और उनके संकेत नए न्यूरॉन्स के विकास को किस तरह प्रभावित कर सकते हैं।
जब हम व्यायाम करते हैं, तो शरीर में कई तरह के रासायनिक और जैविक संकेत उत्पन्न होते हैं। मस्तिष्क में बेहतर रक्त प्रवाह, हार्मोन और वृद्धि कारकों में परिवर्तन तथा विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं के बीच संचार मस्तिष्क को प्रभावित कर सकते हैं। इनमें से कुछ संकेत नई तंत्रिका कोशिकाओं के विकास और उनके जीवित रहने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना सकते हैं।
यह संभावना विशेष रूप से हिप्पोकैम्पस (Hippocampus) जैसे मस्तिष्क क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, जो सीखने और स्मृति से जुड़ा होता है। पशुओं पर किए गए अध्ययनों में पाया गया है कि शारीरिक गतिविधि इस क्षेत्र में नए न्यूरॉन्स के निर्माण को बढ़ा सकती है। हालांकि मनुष्यों में इस प्रक्रिया का अध्ययन अधिक जटिल है और वैज्ञानिक अभी यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि ये प्रभाव मनुष्यों में कितनी मजबूती से काम करते हैं।
यह समझना भी जरूरी है कि इसका अर्थ यह नहीं है कि व्यायाम निश्चित रूप से बड़ी संख्या में नई मस्तिष्क कोशिकाएं बना देगा। न्यूरोजेनेसिस एक जटिल प्रक्रिया है, जिस पर उम्र, नींद, पोषण, तनाव और कई अन्य कारकों का प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा, कोशिकीय स्तर पर उपलब्ध कई महत्वपूर्ण प्रमाण अभी प्रयोगशाला और पशु-अध्ययनों से प्राप्त हुए हैं।
फिर भी, उभरती वैज्ञानिक तस्वीर उत्साहजनक है। व्यायाम केवल शरीर को मजबूत बनाने में ही मदद नहीं कर सकता, बल्कि यह ऐसे जैविक संकेत भी उत्पन्न कर सकता है जो मस्तिष्क को स्वस्थ और अनुकूलनशील बनाए रखने में सहायक हों।
इसलिए नियमित शारीरिक गतिविधि को केवल फिटनेस बनाए रखने के साधन के रूप में नहीं, बल्कि मस्तिष्क के स्वास्थ्य, सीखने की क्षमता और स्वस्थ उम्र बढ़ने को समर्थन देने वाली जीवनशैली का हिस्सा भी माना जाना चाहिए।
मस्तिष्क हमारी अपेक्षा से कहीं अधिक सक्रिय रूप से शारीरिक गतिविधियों का जवाब दे सकता है। हर नियमित सैर, खेल या व्यायाम हमारे शरीर और मस्तिष्क की कोशिकाओं को सक्रिय रहने, अनुकूलन करने और सीखते रहने का संदेश दे सकता है।
डॉ. विजय गर्ग
Eminent Scientist & Academic Editor, Online Magazine FNBworld.com
Malout, Punjab


