डॉ. विजय गर्ग
जब हम किसी जंगल से गुजरते हैं, तो हमारा ध्यान आमतौर पर पेड़ों, पक्षियों, फूलों और जानवरों पर जाता है। लेकिन हमारे पैरों के ठीक नीचे एक दूसरी दुनिया मौजूद है—ऐसी दुनिया जो लगभग पूरी तरह हमारी आँखों से अदृश्य है। जंगल की मिट्टी केवल खनिजों और सड़ी-गली पत्तियों का मिश्रण नहीं है। यह एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र है, जिसमें बैक्टीरिया, कवक, प्रोटिस्ट, नेमाटोड और असंख्य अन्य जीव रहते हैं।
स्वस्थ मिट्टी की बहुत थोड़ी-सी मात्रा में भी आश्चर्यजनक संख्या में जीव पाए जा सकते हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, एक ग्राम मिट्टी में लाखों बैक्टीरिया और हजारों अलग-अलग प्रजातियाँ या आनुवंशिक प्रकार मौजूद हो सकते हैं। यही कारण है कि एक चम्मच मिट्टी को भी एक छोटे-से जीवित संसार के रूप में देखा जा सकता है।
एक ऐसी दुनिया जिसे हम देख नहीं पाते
बैक्टीरिया मिट्टी के सबसे अधिक पाए जाने वाले जीवों में शामिल हैं। वे जैविक पदार्थों को विघटित करने और कार्बन, नाइट्रोजन तथा फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्वों के चक्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कुछ बैक्टीरिया पौधों की जड़ों के आसपास रहते हैं और पौधों तथा कवकों के साथ मिलकर पोषक तत्वों को पौधों के लिए उपलब्ध कराने में सहायता करते हैं।
कवक भी इस भूमिगत समुदाय का एक विशाल हिस्सा हैं। उनकी अत्यंत महीन तंतु जैसी संरचनाएँ, जिन्हें हाइफा (Hyphae) कहा जाता है, मिट्टी में फैलती हैं और पौधों की जड़ों के साथ संबंध बनाती हैं। कई कवक पेड़ों को पानी और पोषक तत्व प्राप्त करने में मदद करते हैं, जबकि कुछ मृत पत्तियों और लकड़ी जैसे पदार्थों को विघटित करते हैं।
इसके बाद प्रोटिस्ट और नेमाटोड आते हैं। कुछ बैक्टीरिया और कवकों को खाते हैं, जबकि कुछ मिट्टी के खाद्य-जाल में अन्य स्तरों पर अपनी भूमिका निभाते हैं। इनके साथ माइट्स, स्प्रिंगटेल्स, केंचुए और अनेक अन्य छोटे जीव मिलकर भोजन और पारिस्थितिक संबंधों का एक जटिल नेटवर्क बनाते हैं।
प्रकृति की पुनर्चक्रण प्रणाली
हर वर्ष जंगल की जमीन पर बड़ी मात्रा में सूखी पत्तियाँ, टहनियाँ और अन्य जैविक पदार्थ गिरते हैं। जो पदार्थ हमें मृत दिखाई देता है, वही मिट्टी में रहने वाले जीवों के लिए भोजन और आवास बन जाता है।
सूक्ष्मजीव जटिल जैविक पदार्थों को सरल पदार्थों में तोड़ते हैं। मिट्टी के छोटे जीव जैविक पदार्थों को छोटे टुकड़ों में विभाजित करते हैं और सूक्ष्मजीवों पर निर्भर रहते हैं। धीरे-धीरे पोषक तत्व मुक्त होते हैं और फिर पौधों के लिए उपलब्ध हो जाते हैं। इस प्रकार जंगल अपनी प्राकृतिक संसाधन-व्यवस्था को लगातार पुनर्चक्रित करता रहता है।
भूमिगत जीवों की यह गतिविधि कार्बन के भंडारण, पोषक तत्वों के चक्र, अपघटन और पौधों की वृद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए मिट्टी की जैव-विविधता केवल छोटे-छोटे जीवों का संग्रह नहीं है; यह पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के सुचारु संचालन का महत्वपूर्ण आधार है।
एक अनजाना जैविक संसार
मिट्टी में रहने वाले जीवों की दुनिया का सबसे आकर्षक पहलू यह है कि इसके बारे में अभी भी बहुत कुछ अज्ञात है। आधुनिक DNA अनुक्रमण तकनीकों ने सूक्ष्मजीवों की ऐसी विशाल विविधता का पता लगाया है, जिसे पारंपरिक तरीकों से पहचानना संभव नहीं था। मिट्टी में पाए जाने वाले बहुत से सूक्ष्मजीवों के बारे में वैज्ञानिकों को अभी प्रजाति-स्तर की पूरी जानकारी नहीं है।
इसका अर्थ है कि जंगल की जमीन के नीचे ऐसे जीव और पारिस्थितिक संबंध मौजूद हो सकते हैं, जिन्हें विज्ञान ने अभी पूरी तरह पहचाना या समझा नहीं है।
किसी पुराने पेड़ के नीचे की मिट्टी को इसलिए एक जीवित पुस्तकालय की तरह देखा जा सकता है—ऐसा पुस्तकालय जिसकी अधिकांश किताबें अभी पढ़ी जानी बाकी हैं।
जंगलों के नष्ट होने का प्रभाव
मिट्टी की यह अदृश्य दुनिया भी अत्यंत संवेदनशील है। वनों की कटाई और प्राकृतिक जंगलों को अन्य उपयोगों में बदलने से मिट्टी में रहने वाले जीवों के समुदाय प्रभावित हो सकते हैं। इससे कार्बन भंडारण, पोषक तत्वों का चक्र, जैविक पदार्थों का अपघटन और पौधों तथा मिट्टी के बीच संबंध जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाएँ प्रभावित हो सकती हैं।
इसलिए जंगलों की रक्षा का अर्थ केवल पेड़ों की रक्षा करना नहीं है। इसका अर्थ उस विशाल भूमिगत समुदाय की रक्षा करना भी है, जो ऊपर दिखाई देने वाले जंगल को जीवित और स्वस्थ बनाए रखने में योगदान देता है।
नीचे देखिए और एक ब्रह्मांड खोजिए
अगली बार जब हम किसी जंगल में चलें, तो यह याद रखना चाहिए कि हमारे प्रत्येक कदम के नीचे अनगिनत जीव सक्रिय हैं। गिरी हुई पत्तियाँ टूट रही हैं, पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण हो रहा है, पेड़ों की जड़ें कवकों और बैक्टीरिया के साथ संबंध बना रही हैं और मिट्टी के भीतर एक विशाल खाद्य-जाल लगातार काम कर रहा है।
जंगल का फर्श शांत दिखाई दे सकता है, लेकिन वह बिल्कुल भी निर्जीव नहीं है।
एक मुट्ठी स्वस्थ मिट्टी हमें प्रकृति का एक अद्भुत सबक सिखाती है—पृथ्वी की महानतम जैव-विविधता का एक बड़ा हिस्सा हमारे सामने नहीं, बल्कि हमारे पैरों के नीचे छिपा हुआ है।
डॉ. विजय गर्ग
सेवानिवृत्त प्राचार्य | प्रख्यात वैज्ञानिक | अकादमिक संपादक, ऑनलाइन मैगज़ीन FNB
मलोट, पंजाब


