29 C
Lucknow
Thursday, August 27, 2026

बाढ़ पीड़ितों की मदद करने पहुंचे पशु चिकित्सा अधिकारी और राजस्व कर्मियों पर रायफल तानी, कातिलाना हमला, पुलिस निश्चित

Must read

– सरकारी ड्यूटी पर गए पशु चिकित्सा अधिकारी से अभद्रता और जान से मारने की धमकी
– कर्मचारियों में आक्रोश, पुलिस दबंगों में को बचाने में जुटी

राजेपुर,फर्रुखाबाद। बाढ़ की विभीषिका के बीच पीड़ितों की मदद और पशुओं के उपचार की जिम्मेदारी निभाने पहुंचे सरकारी पशु चिकित्सा अधिकारी के साथ कथित तौर पर दबंगई और जानलेवा हमला किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि 25 अगस्त की शाम करीब पांच बजे महमदपुर गढ़िया गांव में प्रभारी पशु चिकित्सा अधिकारी राजेपुर डॉ. शरद यादव अपनी सरकारी ड्यूटी के सिलसिले में पहुंचे थे, तभी जवाहर सिंह यादव और सोनेलाल पुत्र जौहरी निवासी महमदपुर गढ़िया ने उनके साथ अभद्रता करते हुए हमला किया और रायफल तान दी।

बताया जा रहा है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में पशुधन को बीमारी और अन्य संकट से बचाने के लिए सरकारी कर्मचारी लगातार गांवों में पहुंच रहे हैं। इसी जिम्मेदारी के तहत डॉ. शरद यादव भी मौके पर पहुंचे थे। आरोप है कि इसी दौरान आरोपितों ने उनके साथ न केवल अभद्रता की, बल्कि उनकी जान को खतरा पैदा करने वाली हरकत भी की।
सबसे गंभीर आरोप रायफल तानने का है। यदि सरकारी ड्यूटी कर रहे अधिकारी पर हथियार तानने का आरोप सही पाया जाता है तो मामला महज कहासुनी या विवाद तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि सरकारी कर्मचारी की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि घटना के बाद राजेपुर थाने में शिकायत की गई, लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। आरोप है कि पूरी घटना दर्ज करने के बजाय केवल एनसीआर लिखकर मामले को सीमित कर दिया गया। पीड़ित कर्मचारियों का कहना है कि सरकारी कार्य में बाधा डालने, अभद्रता और कथित जानलेवा हमले जैसे गंभीर आरोपों के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।

पीड़ित चिकित्सा कर्मी का आरोप है कि राजेपुर थाने के प्रभारी ने सरकारी कर्मचारियों की शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया और कार्रवाई के बजाय मामले को हल्के में लिया गया।

यदि बाढ़ जैसी आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्य में लगे सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों को ही दबंगों के भय में काम करना पड़े, तो प्रशासन की पूरी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। ऐसे में पुलिस की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वह सरकारी अमले को सुरक्षा प्रदान करे तथा कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करे।
मामला यहीं नहीं थमा। बताया गया है कि एसडीएम के आदेश पर लेखपाल पवन, सावन तथा पशु चिकित्सा अधिकारी योगेश कुमार भी मौके पर पहुंचे थे। आरोप है कि इनके साथ भी अभद्रता की गई।

घटना से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों में रोष है। कर्मचारियों का कहना है कि वे विपरीत परिस्थितियों में ग्रामीणों की मदद करने के लिए अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यदि मौके पर उनके साथ इस तरह की घटनाएं होंगी और पुलिस स्तर से प्रभावी कार्रवाई नहीं होगी तो कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित होना स्वाभाविक है।
बाढ़ के बीच आपदा में सरकारी कार्य में बाधा और अन्य आरोपों की शिकायत के बावजूद प्रभावी कानूनी कार्रवाई पुलिस नहीं की, कर्मचारियों में इस बात को लेकर आक्रोश है कि जब प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी बाढ़ पीड़ितों तक मदद पहुंचाने के लिए मैदान में हैं, तब उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article