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Thursday, August 27, 2026

स्वर्ग की तलाश में भटकता इंसान

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भरत चतुर्वेदी

मनुष्य जीवन भर एक बेहतर भविष्य की तलाश में दौड़ता रहता है। कोई मानता है कि अच्छे कर्मों का फल मृत्यु के बाद स्वर्ग के रूप में मिलेगा, तो कोई पूजा-पाठ, व्रत, दान, तीर्थयात्रा और मन्नतों के सहारे उस स्वर्ग की कल्पना करता है।

लेकिन कभी ठहरकर हमने यह सोचने की कोशिश की है कि जिस स्वर्ग की तलाश हम मृत्यु के बाद करना चाहते हैं, उसकी कई सुविधाएँ शायद हमें अभी, इसी जीवन में मिल रही हैं?

सुबह आंख खुलते ही हम जिस दुनिया में होते हैं, वह किसी चमत्कार से कम नहीं। एक स्विच दबाते ही अंधेरा रोशनी में बदल जाता है। पंखा और वातानुकूलित यंत्र गर्मी से राहत देने लगते हैं। नल खोलते ही पानी उपलब्ध हो जाता है। गैस या बिजली के चूल्हे पर कुछ ही मिनटों में भोजन तैयार हो जाता है।

और फिर जेब में रखा एक छोटा-सा मोबाइल हमें पूरी दुनिया से जोड़ देता है। हजारों किलोमीटर दूर बैठे अपने लोगों से हम कुछ ही क्षणों में बात कर सकते हैं, उन्हें देख सकते हैं और दुनिया की किसी भी जानकारी तक पहुंच सकते हैं।
कभी कल्पना कीजिए कि दो-तीन सौ वर्ष पहले का कोई राजा आज हमारे सामान्य से घर में आ जाए।

वह शायद रोशनी, ठंडी हवा, गर्म पानी, मोबाइल, इंटरनेट और कुछ ही मिनटों में तैयार होने वाले भोजन को देखकर हैरान रह जाए। जिस सुविधा को हम आज सामान्य मानते हैं, कभी वही किसी शासक के लिए भी अकल्पनीय विलासिता थी।

फिर सवाल उठता है,इतनी सुविधाओं के बावजूद हम खुश क्यों नहीं हैं? जिस सुविधा की हमें रोज आदत हो जाती है, उसकी कीमत महसूस होना बंद हो जाती है। वातानुकूलित कमरा चल रहा हो तो हमें उसका सुख महसूस नहीं होता, लेकिन बिजली चली जाए तो बेचैनी शुरू हो जाती है। मोबाइल हाथ में हो तो वह सामान्य लगता है, नेटवर्क चला जाए तो पूरी दुनिया जैसे दूर हो जाती है।

अपना घर छोटा लगता है क्योंकि किसी और का घर बड़ा है। अपनी गाड़ी पुरानी लगती है क्योंकि पड़ोसी ने नई गाड़ी खरीद ली। हमारी जिंदगी में मौजूद सुख हमें दिखाई नहीं देते, क्योंकि हमारी नजर लगातार उन चीजों पर टिकी रहती है जो हमारे पास नहीं हैं।

यही तुलना धीरे-धीरे सुख को असंतोष में बदल देती है। हम जिस जीवन को सामान्य समझकर शिकायत करते हैं, वही जीवन दुनिया के करोड़ों लोगों के लिए एक सपना है। आज भी ऐसे परिवार हैं जिनके लिए साफ पानी आसानी से उपलब्ध होना बड़ी बात है। ऐसे बच्चे हैं जिनके लिए स्कूल पहुंचना ही संघर्ष है। ऐसे लोग हैं जिनके पास सुरक्षित घर, पर्याप्त भोजन या मौसम से बचने के साधन तक नहीं हैं।

एक व्यक्ति कुछ मिनट देर से गर्म पानी आने पर परेशान हो सकता है, जबकि दूसरा व्यक्ति पूरे दिन पानी की तलाश में भटक सकता है। किसी के लिए मोबाइल का नया मॉडल जरूरत बन सकता है, तो किसी बच्चे के लिए वही मोबाइल शिक्षा का एकमात्र माध्यम हो सकता है।

इसलिए स्वर्ग और नरक को केवल मृत्यु के बाद की अवधारणाओं तक सीमित करके देखना शायद अधूरा दृष्टिकोण है।
कभी-कभी स्वर्ग परिस्थितियों से ज्यादा दृष्टिकोण में होता है। जिस व्यक्ति के पास कम है, लेकिन जो उपलब्ध चीजों के लिए आभारी है, वह सीमित साधनों में भी संतुष्टि महसूस कर सकता है। दूसरी ओर, जिसके पास बहुत कुछ है, लेकिन जिसकी नजर हमेशा दूसरों की चीजों पर रहती है, वह सुविधाओं के बीच भी असंतुष्ट रह सकता है।

इंसान की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि वह अक्सर अपनी जिंदगी में मौजूद चीजों की सूची नहीं बनाता, बल्कि उन चीजों की गिनती करता रहता है जो उसके पास नहीं हैं। रात को सोने से पहले कुछ क्षण रुककर सोचिए,आज मेरे पास सांस लेने के लिए जीवन है।

पीने के लिए पानी है।खाने के लिए भोजन है।सिर पर छत है।
बात करने के लिए अपने लोग हैं।
और कल को बेहतर बनाने का एक और अवसर है।

शायद आपको महसूस होगा कि जिंदगी उतनी खाली नहीं है, जितनी हम शिकायत करते हुए समझने लगते हैं।
इसका अर्थ यह नहीं कि हमें अपनी समस्याओं या कमियों को नजरअंदाज कर देना चाहिए। बेहतर जीवन की इच्छा रखना गलत नहीं है। आगे बढ़ने की कोशिश भी जरूरी है। लेकिन आगे बढ़ते हुए आज हमारे पास जो है, उसका मूल्य भूल जाना निश्चित रूप से हमारे सुख को कम कर देता है।

कृतज्ञता का अर्थ यह नहीं कि हम सपने देखना छोड़ दें। इसका अर्थ केवल इतना है कि भविष्य के सपनों के पीछे भागते हुए वर्तमान की खुशियों को कुचल न दें। मृत्यु के बाद क्या है, यह रहस्य आज भी हमारे सामने है। स्वर्ग वास्तव में कहां है, कोई निश्चित रूप से नहीं जानता। लेकिन इतना जरूर हमारे सामने है कि हमें यह जीवन मिला है—सांसें मिली हैं, प्रकृति मिली है, रिश्ते मिले हैं, भोजन मिला है और ऐसी सुविधाएं मिली हैं जिनकी कल्पना कुछ पीढ़ियां पहले असंभव समझती थीं।

फिर भी अगर हमारा पूरा जीवन शिकायतों में गुजर जाए, तो शायद समस्या हमारे पास मौजूद दुनिया में नहीं, उसे देखने वाली हमारी नजर में है।

क्यों न आज से अपनी कमियों के साथ-साथ अपनी उपलब्धियों को भी गिनना शुरू करें?
क्यों न यह महसूस करें कि हर दिन अपने आप में एक उपहार है?
और शायद यही उस कथन का सबसे सुंदर अर्थ है,
स्वर्ग कोई दूर की मंजिल नहीं, बल्कि उस क्षण का नाम है जब मनुष्य अपने पास मौजूद जीवन के प्रति कृतज्ञ होना सीख जाता है।
क्योंकि जो मिला है, उसकी कद्र करना स्वर्ग है और जो नहीं मिला, उसकी शिकायत में हर सुख को भुला देना ही नरक।
शायद ऊपर बैठा ईश्वर भी मुस्कुराकर यही कहता हो,
“मैंने तुम्हें बहुत कुछ देकर धरती पर भेजा था, तुमने उसकी गिनती करने के बजाय शिकायतों की गिनती शुरू कर दी।”
इसलिए आज से शिकायतें कम और कृतज्ञताएं ज्यादा गिनिए।
हो सकता है, जिस स्वर्ग को आप पूरी जिंदगी खोजते रहे हैं, वह पहले से ही आपके आसपास मौजूद हो—बस उसे देखने के लिए नजर बदलने की जरूरत हो।

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