काठमांडू। नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन से भारी तबाही हुई है। नेपाल पुलिस के मुताबिक गुरुवार रात तक 389 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में करीब 1,468 लोग लापता या संपर्क से बाहर हैं। सबसे बड़ी चिंता अब नेपाल-चीन सीमा पर बनी नई झील को लेकर है। रसुवागढ़ी बॉर्डर से करीब 18 किलोमीटर ऊपर ल्हेंदे खोला नदी में पानी रुकने से झील बन गई है, जिसका जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इसके टूटने पर भोटेकोशी नदी में फिर अचानक भीषण बाढ़ आ सकती है।
नेपाल के जल तथा मौसम विज्ञान विभाग ने भोटेकोशी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को नदी किनारे से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। झील करीब 0.11 वर्ग किलोमीटर में फैली है। चीनी सरकारी टीवी की ड्रोन फुटेज के मुताबिक इसमें करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा है और अगले तीन दिनों में 30 लाख घन मीटर और पानी आने का अनुमान है। इससे प्राकृतिक बांध टूटने का खतरा बढ़ गया है।
389 मौतें, सैकड़ों घायल
चितवन में सबसे ज्यादा 137 शव बरामद हुए हैं। पूर्वी नवलपरासी में 87, धादिंग में 33, गोरखा में 32, नुवाकोट और तनहुं में 28-28, पश्चिमी नवलपरासी में 27 और रसुवा में 17 शव मिले हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों से 466 घायलों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
910 नेपाली, 558 तिब्बती लापता
बाढ़ के बाद नेपाल में 910 लोग लापता या संपर्क से बाहर हैं, जबकि चीन के तिब्बत क्षेत्र में 558 लोगों की तलाश जारी है। सड़कें और पुल टूटने से राहत-बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। सेना और पुलिस के जवान पैदल तथा हेलिकॉप्टरों से प्रभावित इलाकों तक पहुंच रहे हैं।
84 भारतीय सुरक्षित, 290 से संपर्क नहीं
नेपाल में फंसे भारतीयों के लिए भारत ने राहत अभियान तेज किया है। अब तक 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है, जबकि 290 भारतीयों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इनमें त्रिशूली-1 परियोजना के कर्मचारी और तमिलनाडु के कैलाश मानसरोवर यात्री शामिल हैं।
भारत ने नेपाल के लिए राहत सामग्री और बेली ब्रिज भेजने की तैयारी की है। विदेश मंत्रालय ने 24 घंटे का नियंत्रण कक्ष और दूतावासों में हेल्पलाइन शुरू की है। एनडीआरएफ की टीमें भी जरूरत पड़ने पर नेपाल रवाना होने के लिए तैयार हैं।
13 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात
नेपाल में राहत और बचाव कार्य के लिए 13,295 सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं। नेपाली सेना और निजी हेलिकॉप्टरों से अब तक सैकड़ों लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। नुवाकोट और रसुवा में बिजली-संचार व्यवस्था प्रभावित होने के बाद 500 सौर ऊर्जा पावर बैंक भी भेजे गए हैं।
भूस्खलन से आया 5.2 तीव्रता जैसा झटका
बुधवार सुबह नेपाल-चीन सीमा के पास आए तेज झटके को पहले भूकंप माना गया था। बाद में पता चला कि पहाड़ का बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ ल्हेंदे खोला नदी में गिरा था। इसी भूस्खलन से 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा कंपन पैदा हुआ।
बाढ़ से ग्यिरोंग पोर्ट समेत चीन-नेपाल सीमा का महत्वपूर्ण ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ है। इस बीच पूर्व डीआरडीओ प्रमुख जी. सतीश रेड्डी और उनकी पत्नी समेत 31 कैलाश मानसरोवर यात्री तिब्बत में फंसे हैं।
नेपाल में अब राहत-बचाव के साथ नई बनी झील पर भी नजर रखी जा रही है। यदि प्राकृतिक बांध टूटा तो भोटेकोशी के निचले इलाकों में दूसरी बड़ी बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।


