– 133 भारतीय और 265 चीनी नागरिकों के लापता होने की खबर
– 22 कंक्रीट पुल और 42 किलोमीटर सड़कें बहीं
– तिब्बत सीमा का इमिग्रेशन कार्यालय भी तबाह
काठमांडू। नेपाल में भोटेकोशी नदी में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े इलाके में तबाही मचा दी है। जलप्रलय के चलते अब तक 160 लोगों की मौत की खबर है, जबकि 400 से अधिक कैलाश मानसरोवर यात्रियों के लापता होने की सूचना ने चिंता बढ़ा दी है। लापता यात्रियों में 133 भारतीय और 265 चीनी नागरिक शामिल बताए जा रहे हैं।
अचानक आई बाढ़ का पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि रास्ते में आने वाले वाहनों और लोगों को अपने साथ बहा ले गया। कई इलाकों में संपर्क पूरी तरह टूट गया है और बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक तेज भूकंपीय झटकों के बाद ग्लेशियर टूटने और उससे अचानक भारी मात्रा में पानी आने की आशंका जताई जा रही है। भोटेकोशी नदी में पानी का बहाव अचानक बढ़ा और देखते ही देखते नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया।
जलप्रलय का असर करीब 200 किलोमीटर तक के क्षेत्र में बताया जा रहा है। नदी किनारे बसे इलाकों में भारी नुकसान हुआ है और कई स्थानों पर सड़क संपर्क बाधित हो गया है।
बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 22 कंक्रीट के पुल बह गए, जबकि करीब 42 किलोमीटर सड़क पानी में समा गई। पुल और सड़कें बहने से प्रभावित क्षेत्रों का दूसरे हिस्सों से संपर्क टूट गया है।
तिब्बत सीमा के पास स्थित इमिग्रेशन कार्यालय भी बाढ़ की चपेट में आकर ढह गया। सीमा क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचने से आवाजाही और राहत कार्य भी प्रभावित हुए हैं।
जलप्रलय और भूकंप के कारण नेपाल की करीब एक दर्जन पनबिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की सूचना है। पनबिजली परियोजनाओं को नुकसान के चलते देश के कई हिस्सों में बिजली संकट गहराने की आशंका है।
नेपाल पहले से ही अपनी बिजली व्यवस्था के लिए पनबिजली परियोजनाओं पर काफी निर्भर है। ऐसे में बाढ़ से विद्युत ढांचे को हुआ नुकसान राहत और पुनर्वास की चुनौती को और बढ़ा सकता है।
नेपाल के नुवाकोट, चितवन और गोरखा समेत कई इलाकों में बाढ़ का असर सामने आया है। इसके अलावा तनहुं और नवलपरासी ईस्ट क्षेत्र भी जलप्रलय की चपेट में बताए जा रहे हैं।
कई गांवों और बस्तियों में पानी भर गया है। बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। विभिन्न इलाकों में राहत और बचाव कार्य के दौरान 80 से अधिक सुरक्षाकर्मियों के लापता होने की भी जानकारी सामने आई है।
सबसे बड़ी चिंता कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए यात्रियों को लेकर है। 400 से अधिक यात्रियों के लापता होने की सूचना है। इनमें भारतीय और चीनी नागरिकों की बड़ी संख्या बताई जा रही है।
भारत के 133 नागरिकों के लापता होने की सूचना के बाद भारतीय अधिकारियों की सक्रियता बढ़ गई है। प्रभावित क्षेत्र में संपर्क स्थापित करने और लापता लोगों की जानकारी जुटाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
नेपाल में आई इस विनाशकारी बाढ़ का असर भारत-नेपाल सीमा से लगे उत्तर प्रदेश के जिलों में भी महसूस किया जा सकता है। महराजगंज और कुशीनगर में बाढ़ को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।
नेपाल से आने वाले पानी और सीमा क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। नदियों के जलस्तर और संवेदनशील क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है।
नेपाल में फंसे या लापता भारतीयों के संबंध में जानकारी और सहायता के लिए उत्तर प्रदेश में 1070 हेल्पलाइन जारी की गई है। लोगों से अपील की गई है कि नेपाल में फंसे अपने परिजनों या परिचितों के संबंध में जानकारी होने पर निर्धारित माध्यमों से संपर्क करें।
भूकंप, बाढ़ और बुनियादी ढांचे को हुए भारी नुकसान ने नेपाल के सामने एक साथ कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। सड़क और पुलों के टूटने से राहत सामग्री पहुंचाना मुश्किल हो रहा है, जबकि पनबिजली परियोजनाओं के प्रभावित होने से बिजली आपूर्ति पर भी दबाव बढ़ सकता है।
नेपाल में भोटेकोशी नदी की बाढ़ ने प्रकृति की भयावह ताकत का ऐसा मंजर दिखाया है, जिसमें जान-माल के साथ सड़क, पुल, बिजली और सीमा ढांचे तक तबाह हो गए हैं। सैकड़ों यात्रियों के लापता होने से त्रासदी और गहरी हो गई है। अब सबसे बड़ी चुनौती मलबे और बाढ़ के बीच लापता लोगों को तलाशने तथा प्रभावितों तक राहत पहुंचाने की है।


