नई दिल्ली। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन विदेशी नागरिकों के खिलाफ वीजा कार्रवाई को और सख्त करने की तैयारी में है। अमेरिकी सरकार कारोबार और पर्यटन के लिए जारी किए गए करीब 2 लाख विदेशियों के वीजा रद्द करने पर विचार कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, इनमें ऐसे लोग शामिल हैं जो घूमने या कारोबार के लिए अमेरिका पहुंचे और बाद में वहीं रहने के लिए शरण का आवेदन करने लगे।
अमेरिकी विदेश विभाग आने वाले हफ्तों में इस संबंध में घोषणा कर सकता है। अधिकारियों ने अभी अंतिम संख्या बताने से इनकार किया है। उनका कहना है कि कार्रवाई अलग-अलग चरणों में होगी, इसलिए संख्या में बदलाव हो सकता है। प्रस्तावित कार्रवाई को अमेरिकी इतिहास में एक साथ वीजा रद्द करने की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
वीजा रद्द होने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति को तुरंत अमेरिका से बाहर भेज दिया जाएगा। यदि किसी व्यक्ति ने अमेरिका में शरण के लिए आवेदन किया है और उसका मामला लंबित है, तो वह कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक वहां रह सकता है। हालांकि, उसका पर्यटन या कारोबार वाला वीजा वैध नहीं रहेगा।
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, पिछले 18 महीनों में करीब 1.75 लाख वीजा पहले ही रद्द किए जा चुके हैं। इनमें अपराध के आरोप या दोष सिद्ध होने वाले लोगों के अलावा अमेरिकी नीतियों के खिलाफ गतिविधियों या बयानों से जुड़े मामले भी शामिल हैं।
इधर, अमेरिका में विशेष कुशल कर्मचारियों के वीजा की फीस बढ़ाने का नया प्रस्ताव भी सामने आया है। प्रस्ताव के तहत फीस करीब 99 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। प्रस्ताव प्रकाशित होने के बाद 30 दिनों तक कंपनियों, आम लोगों और अन्य संगठनों से सुझाव लिए जाएंगे। नई फीस साल के अंत तक लागू होने की संभावना है।
अमेरिका हर साल ऐसे वीजा के 85 हजार आवेदन मंजूर करता है, जिनमें करीब 70 हजार भारतीयों को मिलते हैं। ऐसे में प्रस्तावित बदलाव का भारतीय पेशेवरों और कंपनियों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
अमेरिका की कई यूनिवर्सिटीज ने विदेशी छात्रों को 15 सितंबर से पहले अमेरिका लौटने की सलाह दी है। हार्वर्ड समेत कई विश्वविद्यालयों ने छात्रों और शोधकर्ताओं को नए नियमों को लेकर सतर्क किया है। प्रस्तावित बदलावों में पढ़ाई पूरी होने के बाद अमेरिका में रुकने की 60 दिन की मोहलत को घटाकर 30 दिन किए जाने की बात भी सामने आई है।


