प्रयागराज: प्रयागराज (Prayagraj) में प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive examinations) की तैयारी कर रहे छात्रों ने भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितता, लगातार पेपर लीक और न्यायिक मुकदमों के कारण वर्षों तक लंबित रहने वाली भर्तियों को लेकर प्रदर्शन किया। छात्रों ने परीक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सभी चरणों के लिए पारदर्शी और निश्चित परीक्षा कैलेंडर जारी करने की मांग की।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रयागराज पहुंचने वाले छात्रों में यूपीपीसीएस, आरओ/एआरओ, शिक्षक भर्ती, यूपी पुलिस, एसएससी और नीट की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी शामिल हैं। छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में सामने आने वाली विसंगतियों और उसके बाद होने वाली कानूनी कार्रवाई के कारण परीक्षाओं और नियुक्तियों में लंबे समय तक देरी होती है।
छात्रों का आरोप है कि भर्ती का विज्ञापन जारी होने के बाद कई बार उसमें विसंगतियां सामने आती हैं। इसके बाद मामला अदालत पहुंच जाता है और भर्ती प्रक्रिया कई वर्षों तक आगे नहीं बढ़ पाती। अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे समय तक भर्ती अटके रहने से कई छात्रों की निर्धारित उम्र सीमा समाप्त हो जाती है। इससे उनका करियर प्रभावित होता है और वर्षों की तैयारी के बाद भी उन्हें अवसर नहीं मिल पाता।
अभ्यर्थियों के अनुसार वर्ष 2018 की 69,000 शिक्षक भर्ती और वर्ष 2021-2022 की टीजीटी-पीजीटी भर्तियों के बाद से शिक्षक भर्ती प्रक्रियाएं बेहद धीमी गति से आगे बढ़ रही हैं। छात्रों का कहना है कि वर्षों की तैयारी के बावजूद परीक्षाएं निर्धारित समय पर आयोजित नहीं हो पा रही हैं। अभ्यर्थियों ने यूपी पीईटी को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हर साल पीईटी आयोजित होती है, लेकिन इसके माध्यम से होने वाली मुख्य भर्तियों और उपलब्ध पदों की संख्या बेहद सीमित रहती है।
वहीं, लेखपाल और अन्य परीक्षाओं में धांधली की खबरों से मेहनत करने वाले मेधावी छात्रों में निराशा पैदा होती है। छात्रों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से परीक्षा व्यवस्था पर उनका भरोसा प्रभावित होता है। प्रयागराज में लॉज और कमरों में रहकर प्रतिदिन 12 से 14 घंटे लाइब्रेरी में पढ़ाई करने वाले अधिकतर छात्र सामान्य या निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों से आते हैं। छात्रों के मुताबिक परीक्षा रद्द होने या टलने से उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में लगातार अनिश्चितता के कारण उन्हें मानसिक प्रताड़ना का भी सामना करना पड़ता है। वर्षों तक तैयारी करने के बाद परीक्षा और नियुक्ति की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से छात्रों में आक्रोश है। छात्रों ने भर्ती आयोगों और परीक्षा एजेंसियों में निचले स्तर से लेकर उच्च स्तर तक सख्त जवाबदेही तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि पेपर लीक रोकने के लिए कड़े कानूनी प्रावधानों के साथ सभी चरणों के लिए निश्चित और पारदर्शी परीक्षा कैलेंडर लागू किया जाना चाहिए।


