फर्रुखाबाद। अटेवा पेंशन बचाओ मंच एवं ऑल टीचर्स एंड एम्प्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन ने पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने, निजीकरण पर रोक लगाने और शिक्षक भर्ती में टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग उठाई है। संगठन की ओर से प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन भेजकर कर्मचारियों और शिक्षकों की समस्याओं के समाधान की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया कि वर्ष 2004 के बाद नियुक्त शिक्षक, कर्मचारी और अधिकारी नई पेंशन योजना एनपीएस के दायरे में हैं। संगठन का दावा है कि एनपीएस से कर्मचारियों को नुकसान हो रहा है, जबकि सरकार के लिए भी यह व्यवस्था आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण है। संगठन ने पुरानी पेंशन व्यवस्था को कर्मचारियों के हित में बताते हुए इसे फिर से लागू करने की मांग की। ज्ञापन में 20-25 वर्षों से सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्यता को भी गंभीर समस्या बताया गया। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता के कारण उनके सामने नौकरी को लेकर असुरक्षा पैदा हो रही है। इससे शिक्षक और उनके परिवार प्रभावित हो रहे हैं। संगठन ने सरकारी संस्थानों के निजीकरण पर भी चिंता जताते हुए कहा कि शिक्षा समेत महत्वपूर्ण सरकारी सेवाओं का निजीकरण आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ा सकता है। पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री से पुरानी पेंशन बहाल करने, टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने और सरकारी संस्थानों के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग की। ज्ञापन देने वालों में संगठन के प्रदेश, जिला और ब्लॉक स्तर के पदाधिकारी एवं शिक्षक-कर्मचारी शामिल रहे।
पुरानी पेंशन बहाली और टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने की मांग


