फतेहगढ़, फर्रुखाबाद। शासन के निर्देशों के क्रम में शुक्रवार को विकास भवन सभागार, फतेहगढ़ में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का आयोजन किया गया। पर्यटन एवं संस्कृति विभाग की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी के माध्यम से भारत विभाजन के दौरान घटित घटनाओं, विस्थापन और लोगों की पीड़ा से जुड़े विभिन्न पहलुओं को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों के बीच विभाजन विभीषिका से संबंधित डॉक्यूमेंट्री का भी प्रदर्शन किया गया।
कार्यक्रम में लखनऊ से मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार योगी आदित्यनाथ के लाइव संबोधन का प्रसारण भी उपस्थित लोगों ने सुना। इस अवसर पर संभ्रांत नागरिकों, अधिकारियों-कर्मचारियों तथा जनप्रतिनिधियों ने विभाजन की त्रासदी और उसके ऐतिहासिक प्रभावों पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के प्रथम चरण में प्रशासक, जिला पंचायत फर्रुखाबाद सुश्री मोनिका यादव तथा जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। दोनों अधिकारियों ने विभाजन विभीषिका से संबंधित डॉक्यूमेंट्री को गंभीरता से देखा और उपस्थित लोगों के बीच अपने विचार भी रखे।
द्वितीय चरण में जनपद के जनप्रतिनिधियों ने कार्यक्रम में पहुंचकर प्रदर्शनी का अवलोकन किया। सांसद मुकेश राजपूत, विधायक अमृतपुर सुशील शाक्य, विधायक भोजपुर नागेंद्र राठौर, पूर्व विधायक कुलदीप गंगवार तथा भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष फतेहचंद ने प्रदर्शनी का निरीक्षण किया। जनप्रतिनिधियों ने डॉक्यूमेंट्री को गंभीरता से देखा और विभाजन की विभीषिका से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों एवं उससे मिली सीख पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भी भाग लिया। विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर विभाजन के दौरान सामने आई मानवीय पीड़ा, विस्थापन और सामाजिक परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया। इस दौरान नाटक के मंचन के माध्यम से भी विभाजन विभीषिका से जुड़े तथ्यों एवं घटनाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिससे उपस्थित लोगों को उस दौर की परिस्थितियों से रूबरू कराया गया।
कार्यक्रम परियोजना निदेशक, ग्राम्य विकास अभिकरण श्री कपिल कुमार की उपस्थिति में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का समन्वय जिला पर्यटन अधिकारी डॉ. एम. मकबूल द्वारा किया गया। आयोजन का उद्देश्य विभाजन की त्रासदी को स्मरण करते हुए नई पीढ़ी को उसके ऐतिहासिक और मानवीय पक्षों से अवगत कराना तथा भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति न होने का संदेश देना रहा।


