लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद अखिलेश यादव ने बुधवार को केंद्र सरकार पर कई मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम में प्रस्तावित बदलाव, अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों, धार्मिक संस्थाओं, शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था के साथ-साथ एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए। अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार जिस विदेशी अंशदान विनियमन कानून को लेकर आ रही है, उसके खिलाफ पूरा विपक्ष एकजुट है।
अखिलेश यादव ने कहा, “जो सरकार एफसीआरए ला रही है, इसके खिलाफ हम पूरे विपक्ष के लोग हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की ओर से अब तक लाए गए कई महत्वपूर्ण विधेयकों का असर अल्पसंख्यक समुदाय पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीयत साफ नहीं है और जिन मुद्दों पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए, उन पर सरकार पर्याप्त बहस नहीं करा रही है।
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष ने कहा, “जितने भी अब तक महत्वपूर्ण विधेयक आए होंगे, वह सब अल्पसंख्यक के खिलाफ आ रहे हैं। सरकार की नीयत साफ नहीं है।” उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार यह सवाल उठा रहा है कि कानून बनाते समय समाज के सभी वर्गों के हितों और उनके अधिकारों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे की स्थिति को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि एक एक्सप्रेसवे पर 80 गड्ढे हो चुके हैं, जबकि उसके निर्माण पर चार हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी बड़ी धनराशि खर्च होने के बाद सड़क की ऐसी स्थिति होना गंभीर विषय है और इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
उन्होंने जमीनी समस्याओं को सामने लाने वाले स्थानीय मीडिया की भूमिका की भी सराहना की। अखिलेश यादव ने कहा, “मुख्यधारा के मीडिया से अच्छा हमारा मुख्य सड़क मीडिया बन गया है, जो जनता के बीच में है।” उनका कहना था कि जनता के बीच रहकर काम करने वाला स्थानीय मीडिया सड़क, विकास कार्यों और आम लोगों की समस्याओं को सीधे सामने ला रहा है।
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष ने धार्मिक संस्थाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी संसद में बहस की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी का शुरू से पक्ष रहा है कि दोनों महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “समाजवादी पार्टी का पक्ष यही था कि दोनों मुद्दों पर बहस हो, धार्मिक संस्थाओं को लेकर जो हो रहा है और शिक्षा परीक्षा को लेकर जो हो रहा है।”


