सुधाकर कटियार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में बुधवार को कैबिनेट मंत्री राकेश सचान को लेकर राजनीतिक हलचल तेज रही। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राकेश सचान को बुलाकर उनसे मुलाकात की और बधाई दी। मुलाकात को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब राज्यसभा चुनाव के बीच राकेश सचान की समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और सपा नेताओं के साथ तस्वीर सामने आने के बाद राजधानी के राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
मुख्यमंत्री की ओर से राकेश सचान को लेकर दिए गए संदेश को संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बताया गया कि मुख्यमंत्री ने कहा कि जनमानस में लोकप्रिय और जनता के बीच मजबूत पकड़ रखने वाले नेता किसी भी राजनीतिक दल की बड़ी ताकत होते हैं। ऐसे नेताओं की सक्रियता संगठन को मजबूती देती है और जनता से सरकार का सीधा संवाद भी मजबूत होता है।
राकेश सचान की राजनीतिक पहचान केवल मंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि मध्य उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक प्रभावशाली पिछड़ा वर्ग नेता के रूप में भी रही है। वह भोगनीपुर से भाजपा विधायक हैं और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। इससे पहले उनका राजनीतिक सफर समाजवादी पार्टी से शुरू हुआ और बाद में वह कांग्रेस होते हुए भाजपा में पहुंचे।
बुधवार को राकेश सचान की अखिलेश यादव और सपा के राज्यसभा प्रत्याशी धनराज परिमल नथवानी सहित अन्य नेताओं के साथ तस्वीर सामने आई। तस्वीर राज्यसभा चुनाव के नामांकन से जुड़े घटनाक्रम के दौरान की बताई गई है। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे कि आखिर भाजपा सरकार के कैबिनेट मंत्री सपा नेताओं के साथ क्यों नजर आए।
तस्वीर सामने आने के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इसे लेकर अलग-अलग तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं। राज्यसभा की 10 सीटों के चुनाव के बीच यह घटनाक्रम इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि मुकाबले में विधायकों के समर्थन का गणित बेहद महत्वपूर्ण है।
हालांकि, तस्वीर को लेकर उठ रही अटकलों के बीच राकेश सचान ने खुद स्पष्टीकरण दिया और वायरल हो रही खबरों को भ्रामक बताया। उनके मुताबिक उनकी मौजूदगी को जिस राजनीतिक अर्थ में पेश किया जा रहा है, वह सही नहीं है। उन्होंने मुलाकात का संदर्भ विधानसभा अध्यक्ष से हुई मुलाकात और पार्टी के चल रहे अभियान से जोड़ा।
राकेश सचान को लेकर राजनीतिक चर्चा का एक दूसरा पहलू हाल में हुए मंत्रिमंडल विस्तार से भी जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान उनसे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग वापस लिया गया था, जबकि खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग तथा हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग से जुड़े विभाग उनके पास रहे।
इसी पृष्ठभूमि में अब मुख्यमंत्री की ओर से उन्हें बुलाकर बधाई दिए जाने की घटना को राजनीतिक रूप से देखा जा रहा है। हालांकि, इस मुलाकात को किसी संभावित संगठनात्मक बदलाव या राजनीतिक निर्णय से जोड़ने की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है।
राकेश सचान का प्रभाव कानपुर देहात और आसपास के क्षेत्रों की राजनीति में लंबे समय से देखा जाता रहा है। वह पहले समाजवादी पार्टी से विधायक और सांसद रहे, बाद में कांग्रेस से जुड़े और फिर भाजपा में आए। 2022 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर भोगनीपुर विधानसभा सीट से जीत दर्ज की।
यही राजनीतिक पृष्ठभूमि उन्हें उत्तर प्रदेश की बदलती सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों में महत्वपूर्ण बनाती है। भाजपा के भीतर उनका पिछड़े वर्ग के बीच राजनीतिक आधार और क्षेत्रीय प्रभाव भी चर्चा का विषय रहा है।
मौजूदा घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक तरफ राकेश सचान की अखिलेश यादव के साथ तस्वीर ने अटकलों को जन्म दिया, वहीं दूसरी तरफ सचान ने खुद इन अटकलों को खारिज किया है।
राकेश सचान को सीएम योगी ने बुलाकर दी बधाई- बोले,जनमानस में लोकप्रिय नेता पार्टी की ताकत


